बिहार के कई जिलों में बारिश न होने से सूखे का ख’तरा बढ़ा, धान की फसल पर पड़ा बु’रा असर

PATNA : अब तक बाढ़ से जू’झने वाला बिहार अब सूखे की च’पेट में आने लगा है। कई जिलों में इस बार बारिश बहुत कम हुई है जिससे धान की फसल पर भी प्रभावित हुई है। मधुबनी के अधिकांश हिस्सों में कुछ समय पहले बा’ढ़ का पानी फैला था। कई गांव जलमग्न थे लेकिन वही गांव अब सूखे की मा’र झेल रहे हैं।

मधुबनी के किसान सु’खाड़ से परेशान हैं। खेतों में लगी धान की फसलें ब’र्बाद हो रही हैं। बारिश के लिए कई जगहों पर लोग विशेष पूजा कर रहे हैं, नमाज अदा कर रहे हैं। खेतों में पानी की कमी से द’रारें पड़ चुकी हैं। बारिश नहीं होने से धान का बिच’ड़ा भी बर्बा’द हो गया है और लगातार किसान परे’शान हो रहे हैं। जहानाबाद में भी सूखे के हालात बन चुके हैं। पूरा जिला इन दिनों सुखाड़ का दं’श झेल रहा है। बारिश कम होने के कारण खेतों में मात्र 62 प्रतिशत धान की रोपनी की गई है ।

अभी बिहार के सभी 38 जिलों में से 12 जिलों में औसत से 43% बारिश कम हुई है। पटना में मानसून सीजन के चार महीने (जून- सितंबर) के पहले महीने में 68 % कम बारिश हुई थी। देखा जाए तो 13 जिलों में काफी काम बारिश हुई है (20-59%) और 12 ज़िलों में बारिश न होने से सुखाड़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी है, जहां की बारिश 60 % से भी कम हुई है। 1 जून से 26 जून तक बेगूसराय और शेखपुरा में सामान्य बारिश की तुलना में 91% कम बारिश हुई थी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने बिहार की सरकार से मांग की है कि सूखा प्रभावितों को भी छह हज़ार रुपये सहायता राशि के रूप में दिए जाए। पार्टी ने सरकार और प्रशासन पर बाढ़ पी’ड़ितों को पर्याप्त सहायता नहीं देने का आरोप भी लगाया है।