लोक सभा चुनाव में डमी उम्मीदवारों की नहीं चलेगी मनमानी, लगाम कसेगा चुनाव आयोग

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PATNA : चुनाव में किसी खास प्रत्याशी को लाभ पहुंचाने के लिए डमी प्रत्याशी खड़ा करना इस बार परेशानी भरा कदम साबित हो सकता है। चुनाव आयोग ने किसी निर्दलीय प्रत्याशी के डमी पाए जाने पर चुनाव का सारा खर्च डमी प्रत्याशी खड़ा करने वाले प्रत्याशी के खर्चे में जोड़ने का आदेश दिया है। आयोग ने इसके साथ ही डमी प्रत्याशी के खिलाफ आईपीसी की उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। चुनाव में डमी प्रत्याशियों पर लगाम लगाने के लिए चुनाव आयोग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत डमी प्रत्याशी की गाड़ी से या कार्यालय से किसी अन्य पार्टी की प्रचार सामग्री पाए जाने पर आयोग रिपोर्ट दर्ज कराएगा।

ताजा अपडेट के अनुसार लोकसभा चुनाव में डमी उम्मीदवारों पर शिकंजा कसा जाएगा। डमी उम्मीदवारों की पहचान कर चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। नई व्यवस्था के तहत इस बार उम्मीदवारों को चुनावी लाभ के लिए डमी उम्मीदवार खड़ा करना महंगा पड़ने वाला है। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने डमी उम्मीदवारों की पहचान के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके अनुसार प्रचार वाहनों पर दूसरे उम्मीदवार के समर्थक या बैनर-पोस्टर देखे गए तो ऐसे उम्मीदवारों को डमी उम्मीदवार घोषित किया जाएगा। इसके अलावा यदि एक उम्मीदवार के समर्थक दूसरे उम्मीदवारों के साथ वोट मांगते मिले तो इस आधार पर भी किसी एक उम्मीवार को डमी उम्मीदवार माना जाएगा। डमी उम्मीदवारों की पहचान के लिए लोगों से फीडबैक लेने के साथ ही खुफिया तंत्र का भी सहारा लिया जाएगा। सूचना मिलने के बाद ऐसे सभी उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार, चुनाव कार्यालय व चुनाव खातों की निगरानी की जाएगी।

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आयोग ने बताया क्यों खड़े होते हैं डमी उम्मीदवार : आयोग ने बताया है कि डमी उम्मीदवार खड़ा करने के पीछे उद्देश्य यह होता है कि डमी उम्मीदवार को स्वीकृत प्रचार गाड़ी का उपयोग वास्तविक उम्मीदवार अपने पक्ष में करते हैं। इसके अलावा डमी उम्मीदवारों को स्वीकृत पोलिंग एजेंट का उपयोग भी बूथ पर अव्यवस्था फैलाने व बाहुबल दिखाने के अलावा मतदान को प्रभावित करने में किया जाता है। चुनाव खर्च के मामले में भी डमी उम्मीदवारों की अहम भूमिका होती है। वास्तविक उम्मीदवार डमी उम्मीदवार के नाम पर तय सीमा से अधिक चुनाव खर्च करता है।