बिहार के मधुबनी में शिक्षा का हाल बेहाल, एक कमरे में होती है कक्षा 8 तक की पढ़ाई

PATNA : तमाम सरकारी कोशिशों के बावजूद भी जिले में शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त होती नजर आ रही है। खासकर प्रारंभिक विद्यालयों में। यहां तक की विभिन्न विभागों व योजनाओं में अनियमितता लगातार उजागर होती जा रही है। ठंड होने के बावजूद बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। वहीं कई विद्यालयों में चापाकल के अभाव में मध्याह्न भोजन योजना भी प्रभावित हो रही है। कमरों का अभाव आदि समस्याएं प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करते जा रहे हैं। जिले में कई ऐसे विद्यालय हैं जहां एक ही कमरे में एक साथ कई वर्गों के बच्चे पढ़ते हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। कमरों का अभाव जिले में लगभग 200 विद्यालय झेल रहे हैं। कई जगह शटर में तो कई जगह पेड़ के नीचे पढ़ाई होती है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय पेडा चौक में जहां एक साथ आठ वर्ग कक्ष के बच्चे पढ़ाई करते हैं।

SCHOOL

वहीं प्राथमिक विद्यालय सुरतगंज में एक साथ पांच कक्ष के बच्चे पढ़ाई करते हैं। वहीं इसी कमरे में मध्याह्न भोजन भी बनता है जिससे छात्र छात्राओं को काफी परेशानी होती है। लगभग 77 विद्यालयों में शिक्षा समिति का पुनर्गठन नहीं हो सका है। विद्यालय शिक्षा समिति, शिक्षक अभिभावक गोष्ठी, बाल संसद, मीना मंच बस नाम के लिए रह गए हैं । इनकी सक्रिय भागीदारी के अभाव में बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ रही है। शिक्षक शिक्षिकाओं के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए पिछले तीन साल से अधिक समय से निगरानी विभाग की टीम यहां कैंप कर रही है। पर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी अभी तक लगभग तीन हजार नियोजित शिक्षक शिक्षिकाओं का फोल्डर निगरानी विभाग को उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। अभी भी चार प्रखंडों का फोल्डर निगरानी को नहीं सौंपी जा सकी है। इससे फर्जी शिक्षकों की पहचान करने में काफी कठिनाई हो रही है।

अप्रैल माह में ही नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ पर अभी तक आधे बच्चों का नामांकन नहीं हुआ है। यहां तक की कई बच्चे बिना पुस्तक के ही अर्धवार्षिक परीक्षा देने को मजबूर हुए। वहीं पुस्तक के बदले बच्चाें के बैंक में राशि देने की गति भी काफी धीमी है। बिना बेंच डेस्क के फर्श पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करना जिले के प्रारंभिक विद्यालयों की पहचान बन गई है। कहीं-कहीं मध्य विद्यालयों में बेंच डेस्क उपलब्ध भी है लेकिन प्राथमिक विद्यालयों में नहीं के बराबर है। ठंड में इसका खामियाजा बच्चों की उपस्थिति पर पड़ रही है। फर्जी शिक्षक शिक्षिकाओं को बैक डेट पर बहाल करने का मामला भी बार-बार प्रकाश में आता रहता है । केजीवीबी में भी अनियमितताओं का अंबार लगा हुआ है।

जिले में लगभग दो दर्जन ऐसे विद्यालय हैं जो बिल्कुल सड़क से सटे हैं लेकिन अभी तक चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है। इससे किसी बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिले में आए दिन मध्याह्न भोजन योजना में अनियमितता उजागर होती आ रही है। कई विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति अधिक दिखाकर मध्याह्न भोजन योजना में अनियमितता चालू है। यह योजना जिले में कमाने का एक जरिया बनता जा रहा है। जिले के कुल लगभग 200 विद्यालयों में किचन शेड नहीं बन सका है। जिससे मध्याह्न भोजन में अनियमितता का खतरा बना रहता है। वहीं कहीं भी रसोइयों को एप्रन व ग्लव्स पहने नहीं देखा जाता है। डीपीअाे प्रारंभिक शिक्षा राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि स्कूल के पास जमीन नहीं है। अगर लोगों के द्वारा जमीन उपलब्ध कराई जाएगी तो विभाग जमीन के निबंधन के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

The post बिहार के मधुबनी में शिक्षा का हाल बेहाल, एक कमरे में होती है कक्षा 8 तक की पढ़ाई appeared first on Mai Bihari.