खत्म हुआ मोदी लहर, 2014 के बाद एक भी लोकसभा उपचुनाव नहीं जीत सकी भाजपा

Patna …चुनावी चौखट पर खड़े मोदी-शाह को भले साढ़े चार साल तक सत्ता में रहने के बाद अब फिर से 2019 में सत्ता हासिल करने का फार्मूला ‘राम मंदिर’ से निकालना याद आ रहा हो लेकिन जनता तो सरकार के काम काज का हिसाब चुनाव दर चुनाव दे रही है।

अब देखिये न 2014 में 282 लोकसभा सीटें जीतकर सत्ता हासिल करने वाले मोदी को हर लोकसभा उपचुनाव में जनता ने झटका दिया है। आज 6 नवम्बर को जब कर्नाटक में लोकसभा की 3 सीटों पर उपचुनाव के परिणाम आये तब एक बार फिर जनता ने मोदी सरकार के खिलाफ जनादेश दिया। 2019 लोकसभा के पूर्व यह देश में आखिरी लोकसभा उपचुनाव था और भाजपा 3 में से 2 सीटों पर हार गई। इसमें बल्लारी की सीट भी शामिल है जहां से1998 में सोनिया गांधी चुनाव जीती थी लेकिन बाद में जब वह अमेठी/रायबरेली चली गयी तब से भाजपा लगातार यहां से जीतती रही। तो न सिर्फ बल्लारी का गढ़ भाजपा के हाथों से गया बल्कि 2014 में 282 सीटें जीतने वाली भाजपा 2018 में आज के चुनाव परिणाम के बाद सिमटकर 272 सीटों पर आ गयी।

Lalu yadav

यानी हर उपचुनाव के बाद भाजपा के स्थानीय सांसदों और केंद्र सरकार के खिलाफ जनता का परिणाम गया। उपचुनावों में जिन सीटों पर भाजपा हारी है वे सीटें भी साधारण नहीं हैं। इसमें अधिकांश सीटें गोरखपुर और बल्लारी जैसी हैं। तो क्या विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर रही भाजपा के सांसदों के काम का लेखा जोखा सराहनीय नहीं है? सवाल तो यही होगा क्योंकि 2014 के बाद से एक भी लोकसभा उपचुनाव में भाजपा अपनी कोई भी जीती हुयी सीट नहीं बचा पाई है।

माना जाता है कि विधानसभा चुनाव राज्य के स्थानीय मुद्दों पर लड़ा जाता है और निःसंदेह 2014 के बाद से मोदी मैजिक के सहारे भाजपा ने कई राज्यों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। हालांकि दिल्ली, बिहार,गोआ, गुजरात और कर्नाटक में उसे मनमाफिक सफलता नहीं मिली। वहीं पंजाब का गढ़ भी भाजपा के हाथों से जा चुका है।

लेकिन बात लोकसभा उपचुनावों के परिणाम की। कहा जाता है कि लोकसभा सीटों पर चुनाव सांसद और केंद्र सरकार के प्रदर्शन का आकलन होता है। अब यह भाजपा के लिए अजीबोगरीब स्थिति है 2014 के बाद जितने भी लोकसभा सीटों के उपचुनाव हुए सभी जगह भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जनता ने भाजपा के सांसदों और केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की है। सोचिये अगर 2019 में भी भाजपा सांसदों के खिलाफ इसी प्रकार जनता का जनाक्रोश दिखा तो चुनाव परिणाम क्या होगा?

ऐसे भी सरकार का सांसद आदर्श गांव हो या स्मार्ट सिटी जमीन पर कुछ भी नहीं दिखता। यहाँ तक कि नोटबन्दी के फायदे भी अब साहब और उनके सिपहसालार नहीं गिनाते हैं। ऐसी और कई घोषणाएं रहीं जो घोषणा बनकर ही रह गई। बाकि किसान, मजदूर की बेहाली पर बात क्या करें, चौकीदार के नाक के नीचे से नीरव, चौकसी जैसे कई लोग फुर्र हो ही चुके हैं।

इसलिए जनता ने 2014 के बाद से अब तक जिस प्रकार उपचुनावों में एक भी भाजपा सांसद को नहीं जिताया है, उससे सरकार और उसके सांसदों के खिलाफ जनता का गुस्सा तो दिखता ही है। अगर यही ढर्रा 2019 में भी रहा तब न जाने किसके ‘अच्छे दिन’ का जाएं?

साभार…प्रियदर्शन शर्मा, मोकामा

The post खत्म हुआ मोदी लहर, 2014 के बाद एक भी लोकसभा उपचुनाव नहीं जीत सकी भाजपा appeared first on Mai Bihari.