IAS इंटरव्यू : जेब से निकल रहा था रूमाल, पूछ लिया- What is That मिस्टर, UPSC के पूर्व चेयरमैन दीपक गुप्ता से जानिये क्या है जवाब

PATNA : UPSC पास करके IAS और IPS बनना अधिकांश युवकों का सपना होता है। कुछ सालों की मेहनत के बाद पास हो जाते हैं लेकिन अधिकांश प्रतियोगी इंटरव्यू के कठिन सवालों को झेल नहीं पाते हैँ। सालों की मेहनत के बाद भी उनको यह पता नहीं चल पाता कि आखिर उन्होंने इंटरव्यू में क्या गलती कर दी। प्रीलिम्स और मेन्स में तो लिखित जजवाब अच्छे से देकर सभी का दिल जीत लेते हैँ लेकिन इंटरव्यू में बेहद आम सवालों के जवाब भी नहीं दे पाते हैं। इंटरव्यू में क्या प्रश्न पूछे जाएंगे, यह परीक्षा की तैयारी कर रहे हर युवा के जेहन में उत्सुकता का विषय होता है। आखिर 20 से 25 मिनट के दौरान किस तरह के सवाल पूछकर उम्मीदवार की पर्सनैलिटी का टेस्ट लिया जाता है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के पूर्व चेयमैन और IAS अफसर (1974 बैच) रह चुके दीपक गुप्ता ने इंटरव्यू को लेकर कुछ टिप्स दिए हैं। अपनी किताब ‘द स्टील फ्रेम: ए हिस्ट्री ऑफ आईएएस’ को लेकर दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने डिटेल में बताया है कि इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवार का व्यवहार, उसके जवाब कैसे होने चाहिए।


दीपक गुप्ता ने कहा, इंटरव्यू में प्रेसेंस ऑफ माइंड होना काफी जरूरी है। एक काफी पुराना उदाहरण देता हूं – इंटरव्यू रूम में एक उम्मीदवार जैसे ही घुसा, तो उसके चेहरे पर पसीना आ रहा था। वह थोड़ा नर्वस था। उसने अपने रूमाल से अपना मुंह पोंछ लिया। रूमाल वापस अपनी पेंट की जेब में डाल लिया। जैसे ही आगे बढ़ा, तभी इंटरव्यू बोर्ड के चेयरमैन ने उंगली से इशारा करते हुए कहा – What is ‘That’ मिस्टर …. । उम्मीदवार बोर्ड चेयरमैन की उंगली का इशारा देखा तो उसे लग लगा कि वो उसके जेब से बाहर निकल रहे रूमाल की तरफ इशारा कर रही थी। थोड़ा तो वह एंबेरेस हुआ। तब फिर उसने जवाब दिया – ” ‘That Sir … is a demonstrative pronoun ” और अपना रूमाल अंदर कर लिया। इस बढ़िया जवाब को सुनकर इंटरव्यू बोर्ड को पता लग गया कि उम्मीदवार का माइंड बिल्कुल सही जगह पर है। That एक डेमोन्स्ट्रेटिव प्रोनाउन है।
दीपक गुप्ता ने ‘द स्टील फ्रेम: ए हिस्ट्री ऑफ आईएएस (The Steel Frame: A History of the IAS) ‘ में भारत में सिविल सेवाओं के इतिहास पर प्रकाश डाला है। आजादी से पहले और आजादी के बाद यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में आए तमाम बदलावों के बारे में भी इस किताब में चर्चा की गई है। दीपक गुप्ता ने सेंट स्टीफन कॉलेज से मास्टर और जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में एमफिल किया हुआ है। 2011 में मिनिस्ट्री ऑफ रिन्यूवल एनर्जी में सेक्रेटरी पद से रिटायर होने के बाद वह कंसल्टेंट के तौर पर वर्ल्ड बैंक में भी रहे। वर्तमान में वह NSEF के महानिदेशक हैं।
गुप्ता बताते हैं कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में आपके डीएएफ (डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म) से ही ज्यादातर प्रश्न पूछे जाते हैं। डीएएफ देखकर इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य प्रश्न बनाते चले जाते हैं। आप कहां से पासआउट हैं, किस जिले, गांव के रहने वाले हैं, आपका बैकग्राउंड, आपकी रुचि वगैरह वगैरह से प्रश्न जरूर पूछे जाते हैं। यह बात आप एक उदाहरण से अच्छी तरह समझ सकते हैं। दो उम्मीदवारों ने अपने डीएएफ में लिखा हुआ था कि उन्हें फिल्में देखना पसंद है। तो उनसे उन फिल्मों के बारे में पूछ लिया गया जो उस वक्त हाल में रिलीज हुई थी।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करनेवाले उत्तर प्रदेश के सूरज कुमार राय ने बताया, ‘मुझे पूछा गया- ‘आपने आखिरी फिल्म कौन सी देखी थी?’ मैंने उत्तर दिया- पद्मावत। तो मुझसे पद्मावत का क्रिटिकल रिव्यू पूछा गया। पूछा गया कि आपको पद्मावत मूवी कैसी लगी? मैंने उत्तर दिया कि फिल्म के टेक्निकल पार्ट, कॉस्ट्यूम, सेट्स डिजाइन, विजुअल बहुत शानदार और उम्दा थे। लेकिन कहानी थोड़ी और कसी हुई हो सकती थी।
…तो मुझसे पूछा गया कि फिल्म की कहानी में क्या दिक्कत थी? मैंने उत्तर दिया कि इस फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों का ख्याल नहीं रखा गया। ये मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा लिखित पद्मावत से अलग थी। और फिर जब ऐतिहासिक तथ्यों को हिलाया गया है, तो नाम यूज नहीं करना चाहिए था। नाम कोई दूसरा रखा जा सकता था। कहानी सबको पता थी, बस इसे लंबा खींच दिया गया। अपने इस उत्तर को पॉजिटिव नोट के साथ खत्म करते हुए सूरज ने अंत में कहा- इस फिल्म में आर्ट एंड डिजाइन का काम काफी अच्छा था।