दिल्ली के मंदिरों ने फूलों को खाद के रूप में परिवर्तित करने का अपनाया फायदेमंद तरीक़ा

Patna: पुष्प या फूल प्रकृति सौंदर्य, सम्पन्नता, उर्वरता को दर्शाता है। लेकिन नदी तालाब के किनारे तैरते या कई जगहों पे फेंके हुए इस्तेमाल फूल आपको आसानी से दिख जाएंगे। ये फूल अमूमन मंदिरों में भगवन को अर्पित किये हुए फूल होते है। साथ ही सजावट में भी काफी मात्रा में फूलों का ही इस्तेमाल होता है।

ये फूल खुले में फेके जाने के बाद सड़ जाते है और इनसे बदबू भी आती है। और इन बेकार हो चुके फूलों से शेरोन में गन्दगी भी फैलाती है। समारोह या रिवाजों में उपयोग हुए ये फूल वातावरण के लिए मददगार भी हो सकते है। इसके लिए चाहिए बस एक रचनात्मक सोच। फूल ऐसे वस्तु है जो एक भारत ही इस्तेमाल किया जा सकता है। उसके बाद इससे फेंकना ही एकमात्र चारा बचता है।

मगर दिल्ली के कुछ मंदिरों ने इन फूलों को ठिकाना लगाने का एक फायदेमंद तरीक़ा अपना लिया है। वे इन बेकार के फूलों को दुबारा से पौधों के इस्तेमाल करने के लिए खाद के रूप में परिवर्तित कर देते हैं। जैव अपघटक यानि की डिकम्पोज़र मशीन के मदद से इन फूलों को सबसे पहले महीन टुकड़ों में कतरे हैं। इसके बाद इनसे गंधों को छान कर अलग किया जाता है। और बस इतने में ही तैयार हो जाता है इस्तेमाल करने लायक बेहतरीन खाद। जो कहीं से भी नुकसानदेह नहीं होता।

इन खादों का इस्तेमाल मंदिर प्रांगण में लगे पौधों के लिए भी होता है और साथ ही इन्हे आस पास के पेड़ पौधों की जड़ों में डाल दिया जाता है। दिल्ली के लगभग आठ मंदिर संस्थान इन खाद तैयार करने वाले मशीनों का इस्तेमाल कर रहे है। जिसमे इस्कॉन मंदिर और झंडेवालान भी शामिल हैं। जहाँ तकरीबन 3000 श्रद्धालु हर रोज़ दर्शन करने आते हैं। फूल हिन्दू रीती रिवाज़ों में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुछ वास्तु है। कुछ मंदिरों में 400 किलो ग्राम पुष्पीये अपशिष्ट निकलते हैं। इनको जलाशयों में फेंकने से प्रदुषण फैलता है। इसलिए इन फूलों से खाद बनाना एक काबिल-ए-तारीफ उपाय है।

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