बिहार से है गुरु नानक का गहरा नाता, राजगीर में सीएम ने किया सबसे बड़े गुरुद्वारे का शिलान्यास

PATNA:  सभी को मालूम है की बिहार की पावन धरती से सिखों के दसम गुरु श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी का कितना गहरा सम्बन्ध है। लेकिन बहुत काम लोगों को मालूम होगा की सिख पंथ के पहले गुरु का भी बिहार से सम्बन्ध रहा है। और इस समबन्ध का गवाह बने स्थल को बिहार सरकार ने विकसित करने का काम शुरू कर दिया है।

राजगीर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपुलांचल गिरी पर्वत के तलहटी में बसे गुरु नानक शीतल कुंड परिसर का कायाकल्प करने के लिए निर्माणकार्य की आधारशिला रख दी है। राजगीर के गुरु नानक शीतल कुंड में बनने वाले तीन मंजिला गुरूद्वारे की आधारशिला शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रखी। यह तख़्त श्री हरिमन्दिर साहिब के बाद दूसरा सबसे बड़ा गुरुद्वारा होगा। इस मौके पर नीतीश कुमार ने ऐलान किया है की गुरु नानक देव का 550वां प्रकाश पर्व इस साल नवम्बर में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राजगीर की जम कर तारीफ़ की है। सीएम ने कहा की, उन्हें गुरुद्वारा श्री शीतल साहिब के नए रूप में शिलान्यास करने की बहुत ख़ुशी है।


दरअसल, इस जगह की ख़ासियत जानने लायक है। सिखों के लिए इस स्थान का काफ़ी महत्व है। यहां साल भर हज़ारों की संख्या में तीर्थ यात्री पहुंचते हैं। राजगीर अपने ऐतिहासिक कारणों से प्रसिद्द है। लेकिन बहुत कम लोगों को जानकारी होगी की राजगीर में गुरु नानक देव जी ने प्रवास किया था। यहाँ उनके याद में एक गुरुद्वारा भी है। बताया जाता है की, इस ऐतिहासिक स्थान पर 506 ईस्वी विक्रम संवत में गुरूजी ने प्रवास कर धार्मिक दृष्टि से इसे काफ़ी महत्वपूर्ण बना दिया। गुरु नानक जी ने अपने प्रभाव से गर्म कुंड को शीतल बना दिया। आज उस कुंड को लोग ‘गुरु नानक शीतल कुंड’ के नाम से जानते हैं। गुरूद्वारे में एक कुंड है, जिसके बारे में कहा जाता है की, यहां गुरूजी ने धरती में तीर मार कर जल की धार निकाल दी थी।

राजगीर में गर्म कुंड के पास ही स्थित है गुरुद्वारा शीतल कुंड साहिब। कहा जाता है, रजौली से भागलपुर जाने के क्रम में गुरु नानक देव राजगीर में रुके थे। बौद्ध और जैन संतों से चर्चा करने के लिए गुरूजी इस स्थान पर रुके थे। मन जाता है की 20 साल की उम्र में गुरूजी ने 40,000 मील से ज़्यादा की यात्रा की थी। 506 ईस्वी में पहली उदासी क्रम में बाबा गुरु नानक देव बिहार आये थे। इतिहासकारों के अनुसार वे बिहार के राजगीर, पटना, गया, मुंगेर, भागलपुर तथा कहलगाव जैसे स्थानों पर आये थे। दावा है की शीतल कुंड गुरूद्वारे को पटना साहिब जैसे विकसित किया जाएगा। 1 एकड़ 3 डिसमिल क्षेत्र में फैले इस तीन मंजिले गुरूद्वारे का निर्माण कार्य अक्टूबर 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

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