बिहार में दिवाली के अवसर पर बिका 16 रुपए में 40 KG शुद्ध घी, खरीदने के लिए उमड़ी भीड़

पटना: त्योहार के समय धी की खपत जादा होने लगती है इस लिए धी काफी महंगी हो जाता है। लेकिन, पावापुरी में घी की मेहंगाई का कोई असर नहीं दिखता है। यहां 16 रुपये प्रति मन घी की बोली लगती है। एक मन में चालीस किलो होते हैं मतलब 16 रुपये में 40 किलोग्राम, यानी 40 पैसे प्रति किलोग्राम।

दरसल देश और विदेश के जैन धर्मावलंबियों की दिली इच्छा होती है कि वे भगवान महावीर के निर्वाणोत्सव पर  महावीर जी के आरती पर ज्यादा से ज्यादा घी की  बोली लगाएं। यहां घी की बोली लगाने के लिए प्रतिस्पर्धा होती है। उसी प्रतिस्पर्धा में सैकड़ों मन घी की बोली लगाई जाती है। जो राशि जैन प्रबंधनों को बाद में सौंपी दी जाती है।

भगवान महावीर को निर्वाण दिवस के दिन लड्डू चढ़ाने की परंपरा है। जैन परंपरा में अभी भी इसका पालन किया जा रहा है।एक किलो से लेकर सवा मन तक के लड्डू चढ़ाए जाते हैं। इसके लिए खास तौर पर कारीगर बिहारशरीफ व अन्य शहरों से पहुंचते हैं। जैन श्वेताम्बर और दिगंबर प्रबंधन की खास देखरेख में लड्डू का निर्माण किया जाता है। फिर उसे जैन श्रद्धालु अपने माथे पर लेकर निर्वाण स्थली अर्थात जलमंदिर तक लेकर जाते हैं। और, उसे अर्पित करते हैं।

एक विशेष मान्यता के कारण निर्वाण भूमि में जैन श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ यहां जुटती है। मान्यता है कि भगवान महावीर की अंतिम संस्कार भूमि जलमंदिर, जहां पर अभी भगवान की चरण पादुका उनके दो शिष्यों गौतम स्वामी और सुधर्मा स्वामी के साथ अवस्थित है वहां भगवान महावीर की चरण पादुका का छत्र दिवाली की मध्य रात्रि को हिलता डुलता है। इस दृश्य को जो भी जैन श्रद्धालु देखते हैं उनका जीवन धन्य हो जाता है। इस दृश्य को ही देखने के लिए हजारों श्रद्धालु यहां रातभर टकटकी लगाये रहते हैं।

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