गिरिराज सिंह के सिर चढ़ा बेगूसराय का ताज, अपनों के बीच बेगाने हुए कन्हैया

Patna: भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बेगूसराय लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से शानदार जीत हासिल की। वे बेगूसराय का बेटा कन्हैया कुमार के खि’लाफ चुनाव ल’ड़ रहे थे। एक तरफ बेगूसराय-वासियों को राष्ट्र’वादी और हिन्दू’वादी नेता गिरिराज को चुनना था, वहीं दूसरी तरफ देश’द्रोह का आ’रोप झेल चुके और जनता के मुद्दों की बात करने वाले कन्हैया को चुनना था। दोनों को लेकर संशय में पड़ी बेगूसराय की जनता ने आखिरकार राष्ट्रवादी और मोदी पर भरोसा करके गिरिराज को ही अपना सांसद चुनी।

आपको बता दें कि गिरिराज को इस 17वीं लोकसभा चुनाव में कुल 692193 वोट मिला है। इस तरह वे कन्हैया को 422217 वोटों से हरा दिया। कन्हैया को सिर्फ 269976 वोटों से जनसमर्थन मिल पाया। वहीं तीसरे स्थान पर राष्ट्रीय जनता दल के तनवीर हसन रहे हैं। इन्हें कुल 198233 वोट मिला।

गिरिराज सिंह-

गिरिराज इससे पहले नवादा के सांसद थे, लेकिन यह सीट एनडीए के लोक जन शक्ति पार्टी को मिल जाने के कारण, उन्हें भाजपा ने बेगूसराय भेज दिया। शुरुआती दौर में वे यहां आने नहीं चाहते थे, लेकिन बाद में उन्होंने कन्हैया के खिला’फ चुनाव लड़’ने की चुनौ’ती स्वीकार कर ली। कन्हैया के खि’लाफ उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का मुख्य कारण यह भी था कि कन्हैया पर देश’द्रोह का आ’रोप लगा है। वह जनता के मुद्दों बेबाकी से उठाता है और अच्छे-अच्छे नेताओं को अपने सवाल-जवाब से चुप्प करा देता है।

कन्हैया भूमिहार है और बेगूसराय इसका गढ़ है। ऐसे में भाजपा यहां से गिरिराज जैसे हिन्दू’वादी, राष्ट्र’वादी और भूमिहार नेता को उतारा सही समझा। भाजपा की यह रणनीति सफल रही। बेगूसराय में 19 प्रतिशत भूमिहार है, लेकिन अधिकांश देश’द्रोह के आ’रोपी कन्हैया को वोट देने के बजाय राष्ट्र’वादी को वोट दिया और संसद में अपना प्रतिनिधि के रुप में उन्हें चुना।

Giriraj singh and Kanhaiya kumar
Giriraj singh and Kanhaiya kumar
17वीं लोकसभा चुनाव 2019 का नतीजा-
Source: ECI
16वीं लोकसभा चुनाव 2014 का नतीजा-

2014 में डॉ. भोला सिंह भारतीय जनता पार्टी के टिकट से जीते थे। हालांकि उनका निध’न अक्टूबर 2018 में हो गया, तबसे यह सीट खाली पड़ा था। इनसे पहले जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के डॉ. मोनाजिर हसन सांसद थे। 2004 में जदयू के राजीव रंजन सिंह जीते थे। यहां 2004 से भाजप या उसके सहयोगी दलों का क’ब्जा रहा है।

इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ. भोला सिंह को कुल 4,28,227 वोट मिला, जबकि राजद के तनवीर हसन कुल 3,69,892 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहें। यह सीपीआई का गढ़ है, इसलिए मोदी लहर में भी इसके प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद सिंह 1,92,639 वोट मिला और वे तीसरे स्थान पर रहे। चौथे और पांचवें स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी रहे। यहां 2014 में कुल वोटों का 2.47 प्रतिशत नोटा को मिला।

भोला सिंह- भाजपा -428,227 -24%
मो तनवीर हसन- राजद- 369,892 -20%
राजेन्द्र प्रसाद सिंह- सीपीआई- 192,639 -10%

15वीं लोकसभा चुनाव 2014 का नतीजा-

इस चुनाव में जदयू प्रत्याशी डॉ. मोनाजिर हसन जीते थे। उन्होंने सीपीआई के शत्रु’घ्न प्रसाद सिंह को हराया था। तीसरे स्थान पर लोजपा के अनिल चौधरी और चौथे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार अमिता भूषण रहीं। इस चुनाव में कुल 48.75 प्रतिशत ही वोटिंग हुई थी।

मोनाजिर हसन- जदयू -205,680 -13%
शत्रुघ्न प्रसाद सिंह -सीपीआई- 164,843- 11%
अनिल चौधरी- लोजपा-121,786 -8%

बेगूसराय से संसद सदस्य-
क्रम सं.       चुनाव का साल                 सदस्य                            राजनीतिक दल

1                     1952                 मथुरा प्रसाद मिश्रा              भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2                     1957                 मथुरा प्रसाद मिश्रा              भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
3                     1962                 मथुरा प्रसाद मिश्रा              भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
4                    1967                  योगेंद्र शर्मा                            भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
5                    1971                  श्याम नंदन मिश्रा                भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
6                    1977                  श्याम नंदन मिश्रा                जनता पार्टी
7                   1980                   कृष्णा साही                          भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (I)
8                   1984                   कृष्णा साही                          भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
9                  1989                     ललित विजय सिंह              जनता दल

10               1991                    कृष्णा साही                           भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
11               1996                    रामेंद्र कुमार                         स्वतंत्र
12              1998                     राजो सिंह                              भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
13               1999                    राजवंशी महतो                     राष्ट्रीय जनता दल
14               2004                    राजीव रंजन सिंह                 जनता दल (यूनाइटेड)
15               2009                    डॉ. मोनाज़िर हसन              जनता दल (यूनाइटेड)
16               2014                    डॉ. भोला सिंह                        भारतीय जनता पार्टी

17               2019                      गिरिराज सिंह                        भारतीय जनता पार्टी

गौरतलब है कि 2004 तक कांग्रेस व वाम’पंथी दलों के बीच उठा’पटक होती रही। 2004 में एनडीए के जदयू उम्मीदवार राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन को जीते। उसके बाद से कांग्रेस व वामपंथी दलों को लगातार हा’र का सामना करना पड़ा। इसबार फिर से एनडीए और भाजपा के उम्मीदवार ने शानदार जीत हासिल की।

जानियें कौन है giriraj singh/गिरिराज सिंह-

व्यक्तिगत जीवन-

इन्होंने 2014 के चुनावों में बिहार की नवादा सीट से भारतीय जनता पार्टी से चुनाव लड़े थे और जीत भी हा’सिल की थी। इनका जन्म 1952 में, लखीसराय जिले के बड़हिया में, रामअवतार सिंह के भूमिहार ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनकी पत्नी का नाम उमा सिन्हा है। इन्होंने मगध विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। भाजपा के प्रमुख हिन्दु’वादी और राष्ट्र’वादी नेता हैं।

राजनीतिक जीवन-

वे 2014 की मोदी सरकार में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के राज्य मंत्री थे। इससे पहले वे बिहार सरकार में सहकारिता, पशुपालन और मत्स्य संसाधन विकास मंत्री के रूप में काम किये थे। वे 2005 से 2010 तक सहकारिता मंत्री के रूप में और 2010 से 2013 तक पशुपालन मंत्री के रूप में बिहार सरकार में काम किये। वे शुरू से ही नरेंद्र मोदी और भाजपा के क’ट्टर सम’र्थक रहे हैं।

इन्हें जदयू-भाजपा गठबंधन टूट’ने के के बाद नीतीश कुमार ने बर्खा’स्त कर दिया था। वे हमेशा अपने विवा’दित ब’यानों के कारण चर्चा में रहते हैं। 2016 में, उन्होंने एक विवा’दित ब’यान दिये थे और हिंदुओं से आग्रह किये थे कि वे अधिक-से-अधिक बच्चे पैदा करें। सिंह ने जोर देकर कहा था कि भारत में हिंदुओं को अपनी आबादी बढ़ाने की जरुरत है।

गिरिराज सिंह का कार्यकाल-

2002-14 राज्य विधान परिषद के सदस्य रहें।
2008-10 बिहार सरकार में सहकारिता मंत्री
2010-13 पशुपालन और मत्स्य संसाधन विकास मंत्री
2014… नावादा से सांसद और MSME राज्य मंत्री
इसके अलावा वे संसद सदस्यों के वेतन और भत्ते पर संयुक्त समिति के सदस्य, श्रम पर स्थायी समिति के सदस्य,

कौन है, दूसरे स्थान पर रहे कन्हैया कुमार-

कन्हैया का बेगूसराय के बीहट क्षेत्र का रहने वाला है। इसकी मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। इसके पिता अब इस दुनिया में नहीं है। गरीबी से जुझते और संघ’र्ष करते हुए, उसने पीएचडी किया है। Begusarai से भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (CPI) ने लोकसभा चुनाव 2019 का उम्मीदवार बनाया।

कन्हैया जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली से अफ्रीकी-स्टडी पर पीएचडी किया है। फरवरी 2016 में जेएनयू में राष्‍ट्र’विरोधी नारे लगाने के आरो’प में, कन्हैया पर देश’द्रोह का मा’मला दर्ज किया गया था। एक कश्मीरी अलगाव’वादी, जो 2001 में भारतीय संसद पर हम’ला करवाने का दो’षी था, जिसका नाम मोहम्मद अफजल गुरु था। इसी के फां’सी के खि’लाफ जेएनयू में नारे लगाये जा रहे थे। भारत तेरे टुक’ड़े होंगे और अफ़ज़ल हम श’र्मिंदा हैं, तेरे काति’ल जिंदा हैं, नारे लगाने के आ’रोप लगा था। हालांकि कन्हैया पर अभी तक आ’रोप साबित नहीं हो पाया है।

गौरतलब है कि कन्हैया जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) 2015 में छात्रसंघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने गए थे। कन्हैया नरेन्द्र मोदी सरकार की आलोच’नाओं और जनता के मुद्दों को उठाते रहने के कारण हमेशा चर्चा में रहता है।

क्यों हारे कन्हैया-

कुमार के ऊपर देश’द्रोह के आरो’पी होने का ध’ब्बा लगा है, जिसके कारण भूमिहार का वोट गिरिराज के हिस्से में चला गया। उन्हें महागठबंधन से टिकट नहीं मिलने पर अन्य समुदाय का भी वोट बंट गया। मोदी का विशाल छवि और गिरिराज का राष्ट्र’वादी-हिन्दू’वादी व्यक्तित्व भी कन्हैया के हारने की वजह रही है। मुस्लि’मों का वोट कन्हैया को मिल जाने के कारण 2014 भाजपा लहर में 3 लाख से ज्यादा वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहने वाले तनवीर हसन, इसबार मुस्लिम वोट कन्हैया को मिल जाने के कारण 2019 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रह गये।

Giriraj sing, kanhaiya kumar, Tanveer hasan
Giriraj sing, kanhaiya kumar, Tanveer hasan

कौन है तीसरे स्थान पर रहे, प्रो. मो. तनवीर हसन-

वर्तमान में बिहार विधान परिषद् के सदस्य हैं। वे बेगूसराय के बलिया प्रखंड का रहने वाले हैं। साथ ही एक शिक्षित व्यक्ति हैं। वे 1985 में सोवियत संघ में आयोजित विश्व युवा महोत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व किये थे। वे छात्रजीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहें। 1985 में जनता पार्टी के टिकट पर बलिया विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से प्रथम बार चुनाव लड़े लेकिन असफल रहे।

1990 में विधान सभा क्षेत्र से बिहार विधान परिषद् के सदस्य निर्वाचित, 1994 में बिहार प्रदेश युवा जनता दल केअध्यक्ष मनोनीत किए गये। वर्ष 1990 से 1996 एवं 1996 एवं 2002 तथा 2002 से 2008 तक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान परिषद् के सदस्यॉ निर्वाचित हुए तथा मिथिला विश्वविद्यालय के सिंडिकेट के सदस्य निर्वाचित किए गए। 2008 में एक बार फिर से विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए।

जानियें बेगूसराय के बारे में-

begusarai
Begusarai

बेगूसराय यह पूर्वी बिहार का एक दबं’ग जिला है, जिसे CPI का गढ़ कहा जाता है। इसके दो विधानसभा क्षेत्र तेघड़ा और बछवाड़ा को मिनी मास्को भी कहा जाता है। यहां बरौनी रिफाइनरी, थर्मल, फर्टिलाइजर आदि का कारखाना भी है। यह राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की भूमि है, जिन्होंने सत्ता को ललका’रते हुए कहा था कि सिंहा’सन खाली करो कि जनता आती है। दिनकर के नाम पर दिनकर विश्वविद्यालय बनाने की मांग यहां का प्रमुख मुद्दा है।

बेगूसराय में 2011 की जनगणना के अनुसार कुल आबादी 29,70,541 है। इसमें 19 लाख वोटर हैं जिनमें 19 फीसदी भूमि’हार, 15 फीसदी मुस्लि’म, 12 फीसदी यादव और 7 फीसदी कुर्मी समुदाय के लोग हैं। अब तक सबसे ज्यादा भूमिहार उम्मीदवार ही जीतते आये हैं। NDA और CPI दोनों ने भूमिहार वोटों पर भरोसा किया है। जबकि महागठबंधन की नजर मुस्लि’म वोटों पर टिकी है। आरजेडी उम्मीदवार तनवीर हसन को 2014 में, मोदी लहर में 3.69 लाख वोट मिला था। भूमिहारों के अलावा मुस्लिमों, यादवों का भी दबदबा रहा है। इसके बाबजूद एक बार फिर से बेगूसराय को भाजपा और मोदी का समर्थन प्राप्त भूमिहार सांसद गिरिराज सिंह बने हैं। अब देखना यह है कि गिरिराज सिंह नवादा की तरह यहां का विकास करते हैं या वहां से भी अच्छा पूरे विश्व में प्रसिध्द हो चुके जिला बेगूसराय का विकास करते हैं।