सिस्टम से हारे और ‘बिहार के आइंस्‍टीन’ कहे जाने वाले वशिष्ठ नारायण को अस्पताल से मिली छुट्टी

PATNA : महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह को अस्पताल से छुट्टी मिल गयी है। सिजोफ्रेनिया बीमारी से परेशान थे इसलिये उन्हें PMCH में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत बहुत गं’भीर थी लेकिन डाक्टरों की मेहनत से उनकी जा’न बचा ली गयी है।

डॉक्टरों ने बताया है कि इनके शरीर में सोडियम की मात्रा घटकर 120 तक पहुंच चुकी थी। सोडियम चढ़ाए जाने के बाद इसका स्‍तर 135 तक पहुंच चुका है और अब वशिष्ठ नारायण सिंह बातचीत भी करने लगे हैं। बता दें कि PMCH के डॉ अभिजीत ने वशिष्‍ठ नारायण सिंह की मेमोरी को कम्प्यूटर की संज्ञा देते हुए कहा कि 76 साल की उम्र में भी इनकी स्मरणशक्ति युवाओं से  भी अधिक है।

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सिस्टम की लापरवाही से ‘बिहार के आइंस्‍टीन’ की हुई ये हालत-

वशिष्ठ नारायण सिंह की दिमागी हालत आज ठीक नहीं है तो उसका जिम्मेदार कहीं ना कहीं हमारा सिस्टम है। एक ऐसा भारतीय जिसने देश की सेवा करने के लिए अमेरिका का बड़ा ऑफर ठुकरा दिया। सरकारी सिस्टम ने उसे भी नहीं बख्शा और इलाज के लिए मिलने वाली सहायता तक बंद कर दी। देशभक्ति के लिए अमेरिका से वो भारत लौट तो आए लेकिन उनकी हालत ही खराब हो गई। एक बार तो वे लोगों का झूठा खाना तक खाते मिले। पटना साइंस कॉलेज से लेकर आईआईटी और नासा तक का सफर तय करने वाले इस गणितज्ञ ने एक से बढ़कर एक गणित के फॉर्मूले से देश का नाम भी रोशन किया। 1958 में बिहार मैट्रिक बोर्ड की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। हायर सेकेंड्री की परीक्षा में भी उन्हें सर्वोच्च स्थान मिला।

पटना विश्वविद्यायल ने इनके लिए अपना कानून तक बदल दिया और इन्हें सीधे ऊपरी कक्षा में दाखिला दिया। वहां से वशिष्ठ ने BSC आनर्स की परीक्षा में भी सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। वे अमेरिका गए और नासा में भी काम किया। 1967 में वशिष्ठ को कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स का निदेशक बनाया गया।बर्कले यूनिवर्सिटी ने उन्हें जीनियसों का जीनियस कहा था। इनके शोध पत्र की चोरी हो जाने से इनके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ा था।