गोधरा कांड के 17 साल पूरे, अयोध्या से लौट रहे 59 तीर्थयात्रियों को जलाया था जिंदा

PATNA : साल के दूसरे महीने का 27वां दिन एक दुखद घटना के साथ इतिहास के पन्नों में दर्ज है। दरअसल 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन से रवाना हुई साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में उन्मादी भीड़ ने आग लगा दी। इस भीषण अग्निकांड में 59 लोगों की मौत हो गई। अहमदाबाद को जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस गोधरा स्टेशन से चली ही थी कि किसी ने चेन खींचकर गाड़ी रोक ली और फिर पथराव के बाद ट्रेन के एक डिब्बे को आग के हवाले कर दिया गया। ट्रेन में सवार लोग हिंदू तीर्थयात्री थे और अयोध्या से लौट रहे थे। घटना के बाद गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी और जानोमाल का भारी नुकसान हुआ। हालात इस कदर बिगड़े कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जनता से शांति की अपील करनी पड़ी।

27 फरवरी 2002 की सुबह गोधरा में क्या हुआ था : गुजरात दंगा न सिर्फ भारतीय राजनीति के इतिहास का एक बदनुमा दाग है, बल्कि देश की एकता को प्रभावित करने वाला एक बड़ा हादसा भी है। सुनवाई पूरी होने के 29 महीने बाद गुजरात हाई कोर्ट आज इस केस पर अपना फैसला सुना सकता है।

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27 फरवरी की सुबह जैसे ही साबरमती एक्सप्रेस गोधरा रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, उसके एक कोच से आग की लपटें उठने लगीं और धुएं का गुबार निकलने लगा। साबरमती ट्रेन के S-6 कोच के अंदर भीषण आग लगी थी। जिससे कोच में मौजूद यात्री उसकी चपेट में आ गए। इनमें से ज्यादातर वो कारसेवक थे, जो राम मंदिर आंदोलन के तहत अयोध्या में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। आग से झुलसकर 59 कारसेवकों की मौत हो गई। जिसने इस घटना को बड़ा राजनीतिक रूप दे दिया और गुजरात के माथे पर एक अमिट दाग लगा दिया।

जिस वक्त ये हादसा हुआ, नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इस घटना को एक साजिश के तौर पर देखा गया। घटना के बाद शाम में ही मोदी ने बैठक बुलाई। बैठक को लेकर तमाम सवाल उठे। आरोप लगे कि बैठक में ‘क्रिया की प्रतिक्रिया’ होने की बात सामने आई। ट्रेन की आग को साजिश माना गया। ट्रेन में भीड़ द्वारा पेट्रोल डालकर आग लगाने की बात गोधरा कांड की जांच कर रहे नानवती आयोग ने भी मानी। मगर, गोधरा कांड के अगले ही दिन मामला अशांत हो गया। 28 फरवरी को गोधरा से कारसेवकों के शव खुले ट्रक में अहमदाबाद लाए गए। ये घटना भी चर्चा का विषय बनी। इन शवों को परिजनों के बजाय विश्व हिंदू परिषद को सौंपा गया। जल्दी ही गोधरा ट्रेन की इस घटना ने गुजरात में दंगों का रूप ले लिया।