दृष्टिहीन शिक्षक को बनाया हेड एग्जामिनर, छात्रों के भविष्य का ख्याल कर छोड़ना चाहते हैं पद

PATNA:  दिव्यांगता या दृष्टिहीनता अभिशाप नहीं है। जज़्बा और जूनून हो तो दृस्तिहीन भी सबके साथ कंधे से कन्धा मिला कर बेहतर मुकाम हासिल कर सकता है। इस बात को साबित किया है मुजफ्फरपुर के अश्विनी कुमार अशरफ ने। मगर इन जैसे लोगों को अधिकारों की लापरवाही से कभी-कभी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है।

साइंस कॉलेज के प्रोफेसर अश्विनी कुमार पिछले 50 वर्षों हिंदी साहित्य की सेवा में लगे हैं। गजल और शायरी संग्रह सिंह का पूरा घर लाइब्रेरी में तब्दील हो चुका है। अश्विनी कुमार अशरफ को कई वर्षों से एग्जामिनर बनाया जा रहा है इस वर्ष पटना मुख्यालय इन हेड एग्जामिनर बना दिया था। जिससे परेशानी उत्पन्न हो गई है।


अश्विनी कुमार बताते हैं कि एग्जामिनर तो वह कई बार बने हैं। एग्जामिनर बनने में एक एग्जामिनर को अपनी कॉपी देखनी होती है मगर इस बार उन्हें हेड एग्जामिनर बनाया गया है। इसमें कठिनाई यही है कि इनके अंतर्गत में जो को-एग्जामिनर होंगे, तो उन्होंने कैसी मार्किंग की है, अंडर मार्किंग की है या ओवर मार्किंग की है, इसकी जांच वह नहीं कर पाएंगे। क्योंकि इसके लिए देखना जरूरी है।

किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के एग्जामिनर बनने के लिए सरकार ने नियम बनाया है की, उनका कोई भरोसेमंद साथी एग्जामिनर को सवालात पढ़कर सुनाएगा। तब एग्जामिनर बताएगा कि इतना नंबर उसे दिया जाए। लेकिन बतौर हेड एग्जामिनर इतने सारे एग्जामिनर की कॉपी सुनाया नहीं जा सकता है, वह देखने वाली बात है। इसके लिए काफी समय चाहिए और इससे घर पर नहीं देख सकते हैं जो इवेलुएशन सेंटर बनाया वही कॉपी की जांच की जा सकती है।

इस समस्या के कारण अश्विनी कुमार अशरफ ने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया। ताकि बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय ना हो। इस बात की जानकारी मिलने पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ललन सिंह हेड एग्जामिनर के पद से अश्विनी कुमार को मुक्त करने के लिए मुख्यालय को लिखित आदेश भेजा है।

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