JPSC MAINS पर राज्य सरकार के फैसले को हाईकोर्ट ने पलटा, परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटका

RANCHI : झारखंड हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश करते हुए रघुवर सरकार का एक फैसला खारिज कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया है कि JPSC की प्रथम प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के आधार पर ही मुख्य परीक्षा का रिजल्ट प्रकशित किया जाए। इस फैसले से झारखंड के हजारों परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

बता दें कि पहली बार छठी जेपीएससी का परिणाम वर्ष 2017 में आया था। तब करीब 5000 अभ्‍यर्थी पीटी में सफल घोषित किए गए थे। जिसे बाद में हाई कोर्ट के आदेश पर रिवाइज किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा में तीन बार संशोधनों के बाद 34 हजार 634 अभ्‍यर्थी सफल घोषित किए गए थे।

उच्च न्यायालय ने अब सरकार के संकल्‍प को खारिज करते हुए प्रारंभिक परीक्षा के सफल सिर्फ 6103 परीक्षार्थियों के रिजल्‍ट में से मेंस परीक्षा के उत्‍तीर्ण के तौर पर जारी करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले हाईकोर्ट ने 17 सितंबर को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। कार्यवाहक चीफ जस्टिस एचसी मिश्र और जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सोमवार को यह अहम फैसला सुनाया।

कार्यवाहक चीफ जस्टिस एचसी मिश्र और जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने सरकार के आदेश और नियमों का हवाला देते हुए न्यूनतम अंक की अर्हता में बदलाव किया है। न्यायालय के फैसले पर सरकार की ओर से कहा गया है कि उसने छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस तरह की अधिसूचना जारी की थी। इस तरह के कई मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले सही ठहराया था। अब हाईकोर्ट के इस फैसले से छात्र चिंतित हैं क्योंकि इससे हजारों परीक्षार्थियों का भविष्य ख’तरे में पड़ गया है।