होली पर ये दो गांव में हुड़दंग नहीं, बुराइयां छोड़ने के सामूहिक फैसले लिए जाते हैं

Patna: रंगों, गुजिया, गुलाल और बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है होली का त्योहार। जिससे इस साल 21 मार्च को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। वहीं राजस्थान के नागौर जिले के दो गांव- जसवंताबाद और ईनाणा ऐसे हैं, जो हर होली पर एक बुराई को त्याग कर युवाओं से कुछ नया करने का आह्वान करते हैं। इस बार भी किसी कुप्रथा या बुराई को गांव से हटाने पर फैसला लिया जाएगा।

इस गांव में हर साल होली पर ग्राम सभा होती है। सामाजिक सुधारों को लेकर सामूहिक फैसले किए जाते हैं। हर वर्ष एक कुरीति को त्यागा जाता है। यही वजह है कि इस गांव में पूर्ण शराबबंदी, डीजे बजाने पर पूरी तरह रोक, सामाजिक कार्यक्रमों में मेहमानों को परोसे जाने वाले गुड़-अफीम की मनुहार पर रोक जैसी कुप्रथा पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। 1995 में ही गांव में शराब पर पाबंदी लगा दी गई थी। सामाजिक कार्यक्रमों में डीजे और आतिशबाजी पर भी पाबंदी है।

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आपको बता दें कि होली पर शराब माफिया सक्रिय है। जो शराब बेचने के साथ ही शराब का बड़े पैमाने पर स्टॉक कर रहा है। इस बार भी होली में शराबबंदी के बावजूद हरियाणा, पंजाब, झारखंड, दिल्ली के साथ ही पश्चिम बंगाल की शराब लोगों के सर चढ़ कर बोलेगी। पुलिस भी लगातार शराब माफियाओं के किला को ध्वस्त करने में लगी है। जिसमें सफलता भी हाथ लगी है। लेकिन शराब कारोबारी भी पुलिस को चकमा देकर शराब की डिमांड को पूरा करने में लगा है।