नीतीश के गृह जिले में एक पिता को कंधे पर ले जाना पड़ा बच्चे का श’व

PATNA : नीतीश कुमार के गृह जनपद नालंदा में अस्पताल प्रशासन द्वारा एक पिता को श’व वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया जिससे उसे मृ’तक पुत्र का श’व कंधे पर ले जाना पड़ा। मुख्यमंत्री के जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी स्थिति से साफ़ पता चलता है कि प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग का क्या हाल होगा? हालाँकि जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया है और सिविल सर्जन परमानंद चौधरी से इस पूरे मा’मले पर स्पष्टीकरण मांगा है।

बताया जा रहा है कि मृ’तक नालंदा जिले के परवलपुर का रहने वाला था। वह अपने गांव में ही साइकिल चलाते हुए अचानक बे’होश हो गया। इसके बाद उसके परिजनों ने निजी चिकित्सालय में भर्ती करवाया, लेकिन उसे सदर अस्पताल बिहारशरीफ रेफर कर दिया गया था। अस्पताल पहुंचने पर सदर डॉक्टरों ने उसे मृ’त घोषित कर दिया।

जरूरतमंदों को नहीं दिए जाते श’व वाहन-

आपको बता दें कि प्रत्येक जिले के सदर अस्पताल में एक श’व वाहन दिया जाता है, लेकिन ऐसी मु’श्किल परिस्थितियों में भी लोगों को श’व वाहन नहीं दिया जाता है। यह बहुत ही ह्रदय विदा’रक होता है क्योंकि एक तरफ जहां परिजनों को अपने पारिवारिक सदस्य को खो’ने की पी’ड़ा होती है तो दूसरी तरफ  मृ’तक के लिए वाहन न उपलब्ध कराना उनके घा’व पर नम’क छि’ड़कने जैसा होता है। समय समय पर अस्पतालों से ऐसी पी’ड़ादायक ख़बरें आती रहती हैं। लेकिन प्रशासन इन्हे गंभीरता से नहीं लेता है।

ये खबर मुख्यमंत्री के गृह जनपद से आयी है इसलिए इसने लोगों को ज़्यादा वि’चलित कर दिया है।स्वास्थ्य क्षेत्र में खस्ताहाली के सवालों से जूझ रही बिहार सरकार के लिए ये एक और शर्मिंदगी वाली खबर है। यह खबर खुद मुख्यमंत्री के जिले की है इसलिए लोग उनके तथाकथित सुशासन पर सवाल उठा रहे हैं। जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने मा’मले का संज्ञान लिया है और ये सवाल उठाया है कि आखिर श’व वाहन रहते हुए भी जरुरतमंदों को श’व वाहन क्यों नहीं दिए जाते?