बिहार के इस स्कूल में 450 विद्यार्थियों पर हैं एक शिक्षक

PATNA : आए दिन BIHAR की शिक्षा व्यवस्था की पोल खुलती रहती है । चाहे वह बिहार के कुछ विश्वविद्यालों के द्वारा स्नात्तक की डिग्री 3 साल की जगह पांच से सात साल में देने का मामला हो । प्राथमिक या हाईस्कूलों में प्रधानाचार्य द्वारा अपने बहु को सांठ-गांठ द्वारा नौकरी दिलाने का मामला हो । बोर्ड की परीक्षाओं में अभिभावकों द्वारा अपने ही बच्चों को नकल कराकर पास कराने की भागदौड़ ,हमेशा बिहार पूरे भारत में सुर्खियां बनता रहा है ।

बिहार बोर्ड में नकल करवाते अभिभावकों की तस्वीर

ताजा मामला KATIHAR जिले के AAJAMNAGAR प्रखण्ड के अन्तर्गत आने वाला DHENA BAGCHHALA HIGH SCHOOL का है ,जो पहले उत्क्रमित मध्य विद्यालय  था । गांव वालों को  हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए घर से 8 किमी दूर जाना पड़ता था । गांव वालों के आग्रह पर इस स्कूल को हाईस्कूल किया गया । इससे गांव वाले बहुत खुश हुए थे लेकिन आज इस स्कूल का आलम यह है कि यहां लगभग 450 से अधिक विद्यार्थियों पर केवल एक शिक्षक हैं। वह भी छुट्टियों पर हैं ।इस सन्दर्भ में जब हमने  इस स्कूल की प्रभारी प्रधानाचार्य से पूछा तो उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधक द्वारा बाहर के शिक्षकों द्वारा पढ़वाया जाता है ।इस बिषय पर जिला शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि यह सरकार का नीतिगत मामला है ।

सांकेतिक तस्वीर

इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस स्कूल में विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर कैसा होगा । बिहार का केवल इसी स्कूल का यह आलम नहीं है बल्कि बिहार में आने वाले  लगभग-लगभग सारे विश्वविद्यालयों ,कालेजों , हाईस्कूलों और इंटर कालेजों का है ।

इस साल तो और गजब हो गया जब बिहार बोर्ड ने मैट्रिक और इंटर का परिणाम परीक्षा बीतने के एक महीने के अन्दर ही जारी कर दिया । अब प्रश्न उठता है कि जो बिहार जून में परिणाम घोषित करता था फिर भी काॅपी गलत चेक करने के विवाद में फंस जाता था । वह बिहार करीब 1 महीने में ही कैसे सही और सटीक काॅपी चेक करने लगा । क्या पूरे बिहार के हाईस्कूलों और इंटर कालेजों में रिक्त पड़े पदों पर शिक्षकों की भर्ती हो गई? इस प्रश्न उत्तर आप ग्राउंड स्तर पर जाकर देखेंगे तो निश्चित रूप से उत्तर ना में मिलेगा ।

बिहार की सरकार लाख दावा कर ले की वह शिक्षा पर राज्य की आमदनी का लगभग 20 % खर्च कर रही है लेकिन इसका आम लोगों के लिए क्या मतलब ? जब उनके बच्चों को इस खर्चे का कोई फायदा ही नहीं पहुंच रहा है । आज बिहार का कौन सा ऐसा जिला नहीं होगा जहां शिक्षा माफियाओं का झुण्ड सक्रिय न हो । मैं बिहार की जनता की प्रतिनिधि के रूप में बिहार की सरकार से पूछना चाहता हूं कि उसने शिक्षा माफियाओं के गिरोह को समाप्त करने के लिए क्या कोई कदम उठाएं हैं ? बिहार बोर्ड की परीक्षाओं की काॅपी बिना पर्याप्त शिक्षकों की इतना जल्दी कैसे चेक हो गई ?