नालंदा में रोकी कई शोभायात्रा तो शुरू हो गया पथराव, पुलिस ने किया लाठीचार्ज, दागे आंसू गैस के गोले

नालंदा में रोकी कई शोभायात्रा तो शुरू हो गया पथराव, पुलिस ने किया लाठीचार्ज, दागे आंसू गैस के गोले

By: Sudakar Singh
March 29, 05:03
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NALANDA : रामनवमी पर निकाली गई रामरथ शोभायात्रा में बुधवार को जमकर बवाल हुआ। रास्ता रोकने को लेकर पुलिस और शोभा यात्रा में शामिल लोगों के बीच झड़प हो गई। नाराज लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। इस दौरान पुलिस ने भी जमकर लाठियां भांजी और आंसू गैस के गोले भी दागे। स्थानीय लोगों के अनुसार फायरिंग भी की गई है लेकिन पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही है। 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। भीड़ को काबू करने के लिए डीएम डाॅ. त्यागराजन एसएम व एसपी सुधीर कुमार पोरिका को भी सड़क पर उतरना पड़ा। डीआईजी राजेश कुमार भी पहुंचे। पथराव के दौरान राजेश कुमार सिंह नामक एक सिपाही भी जख्मी हो गया।


निर्धारित कार्यक्रम के तहत बजरंग दल के कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण शोभायात्रा में शामिल होने के लिए सिलाव बाजार बाईपास एवं कड़ाहडीह में जमा हुए थे। शोभायात्रा जैसे ही ब्लॉक के पास पहुंची और कड़ाह की ओर जाने लगी वहां जुलूस को रोक दिया गया। इसी बात को लेकर पुलिस के साथ बहस हो गई। जुलूस में काफी संख्या में महिलाएं भी थी। जिसे पुलिस ने भीड़ से अलग किया। बहस के दौरान ही जुलूस के पीछे से किसी ने रोड़ेबाजी कर दी। जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। लोगों का कहना है कि जब एक दिन पूर्व बाकायदा कमेटी बनाकर जुलूस निकालने की अनुमति दी गई तो फिर रोकने का कोई मतलब नहीं रह जाता। सिलाव ब्लॉक के पास बैरिकेडिंग किए जाने से ही बात बढ़ी।


डीएम डा. त्यागराजन ने भी स्थिति को शांतिपूर्ण और नियंत्रण में बताया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस और जुलूस में शामिल लोगों के बीच विवाद हुआ था। जिसे तुरंत ही नियंत्रित कर लिया गया। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जुलूस में 500 से भी अधिक महिलाएं शामिल थी लेकिन महिला पुलिस की तैनाती नहीं के बराबर थी। पुरुष पुलिसकर्मी ही महिलाओं को रोकने में जुटे थे। इस दौरान महिलाओं से भी झड़प हुई। एसपी श्री पोरिका ने बताया कि अफवाह के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है। किसी ने अफवाह फैला दिया कि जुलूस में शामिल लोगों को रोका जा रहा है। 


शोभा यात्रा को लेकर पहले से ही गतिरोध बना हुआ था। मंगलवार को सिलाव थाने में बैठक हुई थी। जिसमें सभी समुदाय के लोग शामिल हुए थे। 10-10 लोगों की कमेटी भी बनी थी और सौहार्दपूर्ण वातावरण में शोभायात्रा निकालने पर सहमति बनी थी लेकिन उपद्रवियों के आगे किसी की नहीं चली।
 

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