गहना बेचकर मां ने पढ़ाया, बिहार का बेटा राजकमल शाह आज है ईसरो का वैज्ञानिक

PATNA : लगन और इच्छा शक्ति हो तो सफलता के रास्ते में कोई भी कमी आड़े नहीं आ सकती। राजकमल शाह ने अपनी सफलता से इस बात को सिद्ध कर दिया है। दरअसल, पूर्णियां जिले के रूपौली प्रखंड के रामपुर परिहट पंचायत के वार्ड नंबर दो निवासी राजकमल शाह के सर से पांच वर्ष की आयु में ही पिता का साया सर से उठने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और आज वे इंडियन इंस्टीच्युट ऑफ साइंस में वैज्ञानिक बन जिले और प्रखंड क्षेत्र में मुफलिसी की जिंदगी गुजार रहे छात्रों के लिए मिसाल पेश की है। राजकमल शाह के बड़े भाई उज्ज्वल शाह ने छोटे भाई की सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि पिता रमेश शाह के गुजर जाने के बाद उनकी मां ने गहना भवानीपुर में बेचकर राजकमल का दाखिला खड़कपुर आईआईटी कॉलेज में कराया।

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उज्जवल बताते हैं कि इसरो में वैज्ञानिक पद के लिए आईआईटी व एनआईटी के करीब 15000 छात्रों ने परीक्षा दी थी। इस परीक्षा में मात्र 57 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। इसमें राजकमल ने भी ने दूसरा स्थान प्राप्त कर मां का सिर गर्व से ऊंचा किया। ज्ञात हो कि स्व. रमेश साह मिठाई की दुकान करते थे। वर्ष 2002 में उनके गुजर जाने के बाद उनकी मां लक्ष्मी देवी ने बेटे की प्रारंभिक का बीड़ा उठाया और उसका नामांकन रूपौली स्थित सरकारी विद्यालय में कराया।

इसके बाद उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय गढ़बनेली में हुआ जहां से इन्होंने 12वीं पास किया। 2013 में इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा पास कर एनआईटी मणिपुर में नामांकन लिया और 2017 में आईआईटी खड़गपुर एमटेक की डिग्री प्राप्त की। एमटेक करने के बाद इस वर्ष उन्होंने इसरो की परीक्षा में सफलता प्राप्त की।