अद्भुत है यह गांव- हर घर में रहता है एक IAS-IPS अफ़सर, रिटायर्ड हेडमास्टर सर ने कर दिया कमाल

PATNA : कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों…जी हां इंसान अगर चाह ले तो क्या नहीं कर सकता। वहीं समुद्रा सीना चीर सकता है। एवरेस्ट को भी झूकने के लिए विवश कर सकता है। दशरथ मांझी बनकर छैनी और हथौरी से पहाड़ को तोड़ सकता है। आज हम बात कर रहे हैं उस एक व्यक्ति की जिसने अपनी मेहनत से एक गांव की तस्वीर बदल कर रख दी। आईएएस, आईपीएस एवं प्रशासनिक अफसरों से भरे इस गाँव में शिक्षा की बीज बोने वाले डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह हैं हमारी आज की कहानी के हीरो। गाँव के युवाओं में जोश और जुनून पैदा करने वाले ये शख्स सच में प्रेरणा के स्रोत हैं।

उत्तर-प्रदेश के चित्रकूट ज़िले का रैपुरा गाँव आज पुरे देश के सामने मिसाल पेश कर रहा है और इसका सारा श्रेय जाता है गाँव के ही एक शिक्षक को। राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद महेंद्र सिंह अपने गाँव लौटे। पठन-पाठन से उनका लगाव इस कदर था कि रिटायर होने के बाद भी उन्होंने इसे जारी रखने का निश्चय किया। इतिहास विषय के एक उम्दा शिक्षक के रूप में पहले से ही वो छात्रों के दिलों में विराजमान थे।

teacher ias
गाँव की दशा और दिशा बदलने का संकल्प लेकर महेंद्र सिंह ने युवाओं को हर संभव सहायता प्रदान करने का निश्चय किया। वह इस बात को बखूबी जानते थे कि युवाओं की तक़दीर ही गाँव की तस्वीर बदल सकती है। साल 1993 में रिटायर होने के बाद उन्होंने गाँव के छात्रों को इतिहास पढ़ाना शुरू कर दिया। साथ ही उन्होंने छात्रों को सरकारी नौकरी हेतु आयोजित प्रतियोगिता परीक्षाओं में बैठने के लिए भी प्रोत्साहित किया। हालाँकि गाँव में ऐसे कई परिवार थे, जिनके बच्चे मेधावी होने के बावजूद आर्थिक परिस्थितियों के तले दबकर अपने सपनों का त्याग कर देते थे।

ऐसे युवाओं के भविष्य-निर्माण के लिए उन्होंने साल 2008 में ‘ग्रामोत्थान’ नामक एक ट्रस्ट की स्थापना की। इस ट्रस्ट से बैनर तले उन्होंने गाँव में सरकारी नौकरी पाने वालों सभी लोगों को जोड़ लिया। ट्रस्ट हर वर्ष दशहरा के दिन दंगल व मेधा सम्मान समारोह का आयोजन करता है। इसके अंतर्गत किसी भी कक्षा में पहला, दूसरा व तीसरा स्थान पाने वाले गांव के बच्चों का सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। इतना ही नहीं इंजीनियरिंग, मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी और प्रवेश में आर्थिक दिक्कतों पर मदद भी मुहैया कराई जाती है।

अब उन्होंने एक मेधा स्मारिका का प्रकाशन शुरू किया है। इस पत्रिका में उन लोगों की कहानियां छपती है जिन्होंने गाँव से निकलकर आईएएस-आईपीएस बनकर देश सेवा कर रहे हैं। महेंद्र प्रसाद सिंह चाहते हैं कि गाँव की नई पीढ़ी इनसे प्रेरणा लेकर उनके ही पद-चिन्हों पर चले और राष्ट्र-निर्माण में अपनी भागीदारी दे। जिस भारत की आत्मा गांवों में बसती है। यदि वहां के गांवों में महेंद्र प्रसाद सिंह जैसे शख्स हों तो सच में देश को महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता। हम उनकी सोच को सलाम करते हैं।

The post अद्भुत है यह गांव- हर घर में रहता है एक IAS-IPS अफ़सर, रिटायर्ड हेडमास्टर सर ने कर दिया कमाल appeared first on Mai Bihari.