एक मंदिर जहां भगवान शिव को चढ़ाई जाती है श’राब

PATNA : अभी तक आप सभी ने मंदिरों में फल,फूल कपड़े और गहनों काे चढ़ावे के रूप में जरूर देखा और सुना होगा लेकिन कभी आपने किसी भगवान को श’राब प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाने के बारे में नहीं पढ़ा होगा । आज हम आपको ऐसे ही अजीबों -गरीब एक मंदिर के बारे में बताएंगे जो आपको आश्चर्यचकित कर देगा। इस मंदिर का नाम है काल भैरव मंदिर ,जो भगवान शिव  और काल भैरव को समर्पित है ।

यह मंदिर मदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित है ।यह  पूरी दुनिया में भगवान शिव को प्रसाद के रूप में श’राब चढ़ाए जाने के लिए प्रसिद्ध है । इस मंदिर के बारे में ऐसीे मान्यता है कि जो भक्त यहां विराजमान महाकाल के दर्शन किए बिना वापस लौट जाता है, उनकी  भगवान शिव की कोई भी अराधना पूर्ण नहीं होती।

इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि अगर कोई शिव भक्त उज्जैन आकर महाकाल की दर्शन तो करले किन्तु काल भैरव मंदिर न आए तो भक्त को महाकाल के दर्शन का आधा लाभ ही मिल पाता । काल भैरव को यह वरदान मिला हुआ है कि भगवान शिव के दर्शन से पहले उनकी दर्शन भक्त करेंगे ।

इस मंदिर के बनने की पीछे की कहानी बहुत ही रोचक है –

स्कंद पुराण के मुताबिक चारों वेदाें के रचयिता ब्रह्मा ने जब पांचवें वेद की रचना करने के बारे में योजना बनाई तब सारे देवता चिंतित हो गए । इस काम पर रोक लगाने के लिए वे भागते-भागते भगवान शिव के पास पहुंचे और उनसे विनती की । इसके बाद शिव ने ब्रह्मा से कहा कि पांचवे वेद की रचना करना शुभ नहीं है ।

इसके बावजूद भी ब्रह्मा नहीं मानें । इस पर क्रोधित होकर शिव ने अपनी तीसरी आंख खोल दी जिससे काल भैरव नामक ज्वाला निकला । इस ज्वाला ने ब्रह्मा के पांचवें सिर को धड़ से अलग कर दिया । इस घटना से ब्रह्मा का घमंड तो टूट गया किन्तु काल भैरव पर ब्रह्मा हत्या का दोष लगा । इसके बाद इस दोष से मुक्ति के लिए काल भैरव दर- दर भटकने लगे । अंत में जब कोई उपाय नहीं मिला तो उन्होंने भगवान शिव की अराधना की ।

शिव भगवान भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और काल भैरव को कहे कि क्षिप्रा नदी में स्नान करके तपस्या करों जिससे तुम्हें ब्रह्म हत्या के दोषों से मुक्ति मिल जाएगी । तभी से काल भैरव यहां विराजमान हैं ।काल भैरव मदिर में दिन में दो बार आरती होती है । सुबह साढ़े आठ बजे और रात्रि साढ़े आठ बजे । उज्जैन महाकाल की नगरी है इसलिए काल भैरव को इस नगर का सेनापति भी कहा जाता है ।