जदयू NDA में पहले से ही Comfortable, कांग्रेस का है खस्ताहाल-केसी त्यागी

PATNA: महागठबंधन के नेताओं द्वारा एनडीए में फूट पड़ने वाले बयान पर जदयू महासचिव और प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा है कि एनडीए में जदयू पहले से ही Comfortable है। कांग्रेस जैसी पार्टियों का हाल खस्ता हो चुका है तो उसके साथ हमलोग कहीं भी किसी भी स्टेज पर हाथ क्यों मिलाये?

त्यागी का कहना है कि भले जदयू केन्द्र सरकार की हिस्सा नहीं है, लेकिन राज्य में सबसे सशक्त संगठन है और हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश के सबसे यशस्वी सीएम हैं। हमलोग 2020 के विधानसभा की तैयारी में जुटे हुए है और फिलहाल एनडीए से अलग होने की ना तो संभवना है और ना ही संभव है। केन्द्र में जदयू का मंत्री शामिल नहीं हुआ, इससे हमलोग असहज जरूर महसूस करते हैं, लेकिन इससे यह सोचना की हमलोग एनडीए से बाहर निकलने वाले है, यह पूरी तरह काल्पनिक है।

CM NITISH KUMAR AND KC TYAGI
बढ़ रही है दूरियां-

आपको बता दें कि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के रिश्तों में खटास नहीं आयी है। खटास बढ़ने का ताजा उदाहरण लोजपा नेता रामविलास पासवान के आवास पर हुई, इफ्तार पार्टी में देखा जा सकता है। यहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी दोनों आये थे, लेकिन दोनों हाथ तक नहीं मिलाये। हाल ही में गिरिराज सिंह भी नीतीश कुमार की इफ्तार वाली फोटो की आलोचना की और नीतीश को दिखावा करने वाला नेता बताया। इसके अलावा नीतीश ने महागठबंधन के नेता जीतनराम मांझी को अपनी इफ्तार पार्टी में आमंत्रित किया साथ ही उनकी इफ्तार पार्टी में भी शिरकत की।

क्यों बढ़ रही है भाजपा और जदयू के बीच की दूरियां-

30 मई को राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री सहित 57 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता का शपथ दिलाये, जिसमें जदयू के एक भी मंत्री शामिल नहीं है।आपको बता दें कि भाजपा ने जदयू को एक मंत्री पद देने की पेशकश की थी, लेकिन जदयू का कहना था कि लोजपा छह सीटें जीती है और उसे एक मंत्री पद मिला है तो 16 सीटें जीतने वाले जदयू को कम-से-कम तीन मंत्री पद मिलना चाहिए। भाजपा ने नीतीश के इस प्रस्ताव को नहीं स्वीकारा, जिसके कारण नीतीश मोदी के मंत्रिमंडल में अपना सांसद नहीं भेजा। इसके बाद से नीतीश के चेहरे पर नाराजगी को देखा जा सकता है। इसके बाद नीतीश ने भी अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया, जिसमें भाजपा के एक भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया, जिससे बढ़ती दूरियों को और भी शक की नजरों से देखा जाने लगा है।