बिहार के केसरिया में है विश्व का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप

NEW DELHI : भारत(BHARAT) में जन्मा बौद्ध धर्म(BAUDH DHARM) केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को शांति और अंहिसा का पाठ पढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है ।भारत का बिहार राज्य अपनी सभ्यता ,संस्कृति और अपने गौरवशाली इतिहास के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है । बिहार राज्य आर्यभट्ट(ARYABHATT) ,बिष्णु गुप्त(चाणक्य)(VISHNU GUPT) ,महान सम्राट अशोक (ASHOK) जैस महान लोगों की कर्मस्थली रहा है ।

प्राचीन समय से लेकर आज तक बिहार(BIHAR)  अपने गौरवशाली परम्परा को सहेजे हुए है । यही वह भूमि है जहां महात्मा बुद्ध(MAHATAMA BUDDH) को बोधगया नामक स्थान पर ज्ञान की प्राप्ति हुई थी । यह राज्य बौद्ध धर्म के विरासत को प्रकट करने की जगह रही है । इसी भूमि पर नालंदा और बौद्ध गया जैसे स्थान विराजमान हैं जो बौद्ध धर्म को मानने वाले के लिए विश्व की पवित्र जगहों में से एक हैं। आज हम आपको बिहार के एक ऐसे जगह के बारे में बताएंगे जिससे आप अब तक अनजान रहे हैं ।

बिहार राज्य के पूर्वी चम्पारण(EAST CHAMPARAN) जिले में केसरिया नामक एक बौद्ध स्थल है जिसे पूरे विश्व का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप को सहेज कर रखने का गौरव प्राप्त है । इस स्तूप को केसरिया स्तूप के नाम से  जाना जाता है ।

केसरिया बौद्ध स्तूप के बनने की कहानी

इस स्तूप के स्थापित होने के पीछे मान्यता है कि जब महात्मा बुद्ध बिहार के वैशाली से महापरिनिर्वाण प्राप्ति के लिए कुशीनगर के लिए जा रहे थे तो रास्ते में पड़े केसरिया में उन्होंने एक रात बिताई और बौद्ध भिक्षुओं को अपना भिक्षा-पात्र प्रदान किया था । कहा जाता है कि जब भगवान बुद्ध यहां से जान लगे तो बौद्ध भिक्षुओं ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। भगवान बुद्ध नहीं मानें और बौद्ध भिक्षुओं से बचने के लिए उन्होंने नदी में कृतिम बाढ़ उत्पन्न कर दी, जिसके बाद ही गौतम बुद्ध भिक्षुओं से पीछा छोडा पाए थे । सम्राट अशोक ने बुद्ध की इस यात्रा को हमेशा के लिए यादगार बनाने के लिए अपने शासनकाल में केसरिया स्तूप का निर्माण करवाया था ।

केसरिया स्तूप की विशेषताएं

1.यह स्तूप 1400 फीट के क्षेत्र में फैला हुआ है ।वर्तमान समय में इसकी ऊंचाई 104 फीट है । इस स्तूप में प्रयोग किए गए ईट मौर्यकालीन हैं ।
2. यह स्तूप छह मंजिलों में विभक्त है।यह स्तूप पहली मंजिल से लेकर सातवीं मंजिल तक एक क्रम में छोटे-छोटे कमरों में विभक्त है ।जिसमें महात्मा बु्द्ध के मूर्तियों के अवशेष सजा कर रखे गए हैं , जो इस स्तूप को भव्यता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं ।

बौद्ध धर्म विश्व का  एक ऐसा धर्म है जिसमें किसी भी प्रकार का पाखण्ड और आडंबर नहीं पाए जाते । यह धर्म भारत की प्राचीन समय से चली आ रही भ्रमण परम्परा से निकली हुई है । ईसाई धर्म के बाद बौद्ध धर्म विश्व का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है ।

अमेरिकी रिसर्च एजेंसी प्यु के मुताबिक दुनियाभर में बौद्ध धर्म के लगभग 54 करोड़ अनुयायी है ,जो दुनिया की कुल जनसंख्या का लगभग 7% है । इस धर्म की स्थापना ईसा पूर्व 6 वीं शताब्दी में गौतम बुद्ध द्वारा भारत में किया गया था । यह केवल धर्म ही नही बल्कि विश्व के लिए एक महान दर्शन है। यह धर्म शुरू-शुरू में केवल भारतीय उपमहाद्वीप में ही फैला था किन्तु अगले दो हजार वर्षों में यह लगभग पूरे विश्व में फैल गया । आज के समय में दुनिया भर के 200 से अधिक देशों में बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग हैं ।

चीन(CHINA),जापान(JAPAN),थाइलैण्ड(THAILAND,म्यान्मार(MYANMAR),भूटान(BHUTAN),श्रीलंका(SHRILANKA) ,कंबोडिया(COMBODIA) ,मंगोलिया(MANGOLIYA) ,सिंगापुर(SINGAPUR) और लाओस(LAOS) समेत कुल 13 देशों में बौद्ध धर्म प्रमुख धर्म है ।