जमानत के लिए लालू को करना होगा इंतज़ार, कोर्ट ने सीबीआई से दो हफ़्तों में माँगा जवाब

PATNA : चारा घोटाले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमों लालू यादव जेल से बाहर आने के लिए इंतज़ार करना होगा। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सीबीआई को अपना जवाब देने के लिए 2 हफ़्तों का समय दिया है। कोर्ट जानना चाहती है कि लालू यादव को जमानत क्यों नहीं दी जाए। इसका साफ़ मतलब है कि लालू यादव और उनके समर्थकों को अभी और इंतज़ार करना होगा। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, लालू यादव क पक्ष रख रहे हैं। लालू यादव की तरफ से दलील है कि एक मामले में 22 महीने, दुसरे मामले में 13 महीने और तीसरे मामले में 21 महीनों की सजा काट चुके हैं। लेकिन उनको बढती उम्र और बिमारी के कारण जमानत चाहिए। सीबीआई को अपना जवाब करने के  लिए 29 मार्च तक का समय दिया गया है। उसके बाद अगली सुनवाई होगी। 

 लालू यादव ने बिमारी का हवाला दे कर सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। इससे पहले रांची हाई कोर्ट से उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। रांची हाई कोर्ट ने उनके अपराधों को गंभीर अपराध बताते हुए उनके दलीलों को खारिज कर दिया था  जिसके बाद लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लालू दिसंबर 2017 से जेल में बंद हैं। 71 वर्षीय लालू ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी उम्र  और चुनाव को देखते हुए अपनी पार्टी को उनकी जरूरतों का हवाला दे कर अपनी जमानत की अर्जी लगाई है। भ्रष्टाचारी और गंभीर अपराधों में दागी नेताओं को चुनाव लड़ने से सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्रतिबंधित कर चूका है। अपनी बिमारी के इलाज के लिए वो पहले से ही रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती हैं।

Quaint Media, Quaint Media consultant pvt ltd, Quaint Media archives, Quaint Media pvt ltd archives Live Bihar, Live Bihar, Live India

लालू का परिवार और समर्थक उनके जमानत पर बाहर आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है। अगर लालू की जमानत याचिका मंजूर हो जाती तो न सिर्फ राजद का आत्मविश्वास बढ़ जाता बल्कि महागठबंधन में मची कलह पर भी लालू बाहर आ कर लगाम लगा सकते । भले ही लालू सक्रीय राजनीति में न हो लेकिन आज भी वो अपने वोट बैंक को एकजुट करने की ताकत रखते हैं। उनके बाहर आने से टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार तक में राजद की रणनीति पूरी तरह बदल जाती और एनडीए की भी चुनौतियाँ बढ़ जाती लेकिन अब राजद समर्थकों को अभी और इंतज़ार करना होगा।