हमरा आरक्षण नहि, पाठशालामे मैथिली चाही, प्राथमिक शिक्षा में मैथिली को लेकर पत्र अभियान शुरू

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PATNA ; देर से ही सही लेकिन लोग अब खुल कर कहने लगे हैं कि प्राथमिक शिक्षा में मैथिली को शामिल किया जाना चाहिए। मिथिला सहित बिहार के सभी बच्चों को मैथिली विषय में पढ़ाई करवाई जानी चाहिए। इसको लेकर सोशल मीडिया से लेकर धरातल पर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।

ताजा अपडेट के अनुसार बिहार की एक मात्र संवैधानिक भाषा को आज भी वह मान सम्मान नहीं मिल पाया है जो उसे मिलना चाहिए। मिथिला के लोगों की यह शिकायत है कि बिहार सरकार साजिश के तहत मैथिली को प्राथमिक शिक्षा में शामिल नहीं कर रही है। जबकि पटना हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में बिहार सरकार को आदेश देते हुए कहा था कि प्राथमिक शिक्षा में मैथिली को शामिल किया जाना चाहिए।

इधर देश की राजधानी दिल्ली में रह रहे मैथिली भाषा प्रेमियों ने इस विषय में पत्र अभियान चलाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि दुर्भावनावश प्राथमिक शिक्षा में मैथिली को लागू नहीं किया जा रहा है और ना ही सरकारी कार्यालय में इस भाषा का प्रयोग हो रहा है। बिहार सरकार के इस रवैये से साफ स्पष्ट है कि संविधान की धारा 350 क का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। मैथिली देश की संवैधानिक भाषा होने के साथ साथ संघ लोक सेवा आयोग, बिहार लोक सेवा आयोग और साहित्य अकादेमी में मान्य है। इस पत्र को अब तक हजारों लोगों ने डाक के माध्यम से पीएम मोदी को भेजा है।

उधर मधुबनी में जगह जगह पाठाशाला नामक अभियान चलाया जा रहा है। ताकि लोगों को उनके अधिकार के लिए जागरूक किया जा सके। कुल मिलाकर अब इतना तो कहा जा सकता है कि मिथिला के लोगों ने ठान लिया है कि…हमरा आरक्षण नहि, पाठशालामे मैथिली चाही…ठीक छै

नोट : अगर आप भी चाहते हैं कि मैथिली को प्राथमिक शिक्षा में शामिल होना चाहिए तो तीन सौ शब्दों में अपनी बात लिखकर हमें 8292560971 पर ह्वाट्सअप करें…लाइव बिहार पर उसे प्रकाशित किया जाएगा

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