मात्र 120 सैनिक लेकर मेजर कुलदीप ने 3000 पाकिस्तानी सैनिकों को हराया..तिरंगा फहराया

New Delhi :  हम बात कर रहे हैं देश के उन हीरोज की जिन्होंने देश के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। बात है 1971 की लड़ाई की। 1971 भारत-पाक युद्ध 3 से 12 दिसंबर तक चला था। इस जंग के गवाह बने थे मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी। आज तक लोगों के रौंगटे खड़े कर देने वाली ‘बॉर्डर’ फिल्म में सनी देओल ने ब्रिगेडियर चांदपुरी का ही किरदार निभाया था। चांदपुरी अब इस दुनिया में नहीं हैं।

चांदपुरी को लौंगेवाला की लड़ाई में हीरो माना जाता है। लौंगेवाला पोस्‍ट शायद हमारी सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी और इस चुनौती को पूरा करने का जिम्‍मा दिया गया था मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी को।

1971 की लड़ाई के समय मेजर चांदपुरी को पंजाब रेजीमेंट की 23वीं बटालियन को लीड करने का मौका मिला। इससे पहले वह 1965 की लड़ाई में भी पाक सेना को धूल चटा चुके थे। मेजर चांदपुरी के पास सिर्फ 120 लोगों का ट्रूप था, जबकि सामने थे पाक की 51वीं इंफ्रेंटी ब्रिगेड के 2,000 से 3,000 सैनिक। इसके साथ 22वीं आर्म्ड रेजीमेंट की भी मदद उसे मिल रही थी।

5 दिसंबर 1971 को एकदम तड़के दुश्‍मन ने भारतीय सेना पर हमला बोल दिया। पूरी रात उन्‍होंने 120 लोगों की कंपनी के साथ दुश्‍मनों का मुकाबला किया। चांदपुरी अपने सैनिकों में रिइंफोर्समेंट आने तक जोश भरते रहे, ताकि वह दुश्‍मन का मुकाबला कर सकें। एक बंकर से दूसरे बंकर तक जाकर वह अपने सैनिकों को उत्‍सा‍हित करते रहे। हमारे सैनिक आज भी सबसे बहादुर हैं। उस समय एयरफोर्स के पास जो एयरक्राफ्ट्स थे, वह रात में लड़ाई नहीं कर सकते थे। सुबह तक मेजर चांदपुरी और उनकी कंपनी बहादुरों की तरह दुश्‍मन से लड़ती रही। सुबह जब एयरफोर्स पहुंची, तो उसकी मदद सेना को मिली। लड़ाई के बाद मेजर चांदपुरी को महावीर चक्र से पुरस्कृत किया गया।