सेना की वर्दी पहन चुनावी रैली में पहुंचे ‘रिंकिया के पापा’ मनोज तिवारी, पार्टियों ने की आलोचना

PATNA : भाजपा और अन्य राजनितिक पार्टियाँ भले ही ये कहें कि सेना और उसके शौर्य का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए लेकिन सच्चाई इससे कोशों दूर हैं।  दोनों ही पार्टियाँ अपने अपने सहूलियत के हिसाब से सेना और उसके शौर्य का इस्तेमाल राजनितिक फायदे के लिए कर रही है और एक दुसरे को ज्ञान भी दे रही है कि सेना का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने सेना की वर्दी पहन कर एक चुनावी रैली में शिरकत की। 

भोजपुरी गायक और अभिनेता से राजनीतिज्ञ बने  मनोज तिवारी उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के यमुना विहार इलाके में सेना की वर्दी पहन कर एक बैक रैली को हरी झंडी दिखाने पहुंचे। अपनी इस हारकर के बाद वो तुरंत विरोधियों के निशाने पर आ गए। हालाँकि अपनी आलोचना पर खुद का बचाव करते हुए उन्होंने तर्क दिया “मुझे अपनी सेना पर गर्व है इसलिए मैंने वर्दी पहनी।”  उन्होंने ये तर्क भी दिया कि “अगर मैं नेहरू जैकेट पहन लूँ तो क्या वो नेहरू जी का अपमान हो जाएगा?”

ये पहला मौका नहीं है जब भाजपा नेताओं की तरफ से वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के आ’तंकी ठिकानों पर किये गए हवाई हमलों का राजनितिक पायदा लेने की कोशिश की जा रही हो। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने एक विवादित बयान देते हुए कहा था कि सेना के शौर्य का जश्न मनाने के लिए लोग एनडीए की संकल्प रैली में आयें। कुछ ही दिन पहले कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदुरप्पा ने कहा था कि एयर स्ट्राइक की बजह से भाजपा 22 सीटें जीतेगी जिसपर काफी बखेड़ा हुआ था। जबकि पार्टी के शीर्ष नेता खुद कहते रहते हैं कि सेना का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। विरोधी पार्टियाँ भी कम नहीं है। जब  भाजपा सेना के नाम पर राजनितिक फायदा लेने की कोशिश करती है और उसे फायदा मिलता दिखता है तो विरोधी पार्टियाँ सेना से सर्जिकल स्ट्राइक का प्रूफ मांगने लगती हैं और ये गिनाने लगती हैं कि फलाना पायलट उनके शासन के दौरान पायलट बना था।