कोसी क्षेत्र जहां पानी में भी चलता है ट्रैक्टर-बोलेरो, एक साथ जानवर-इंसान करते हैं नाव की सवारी

कोसी क्षेत्र जहां पानी में भी चलता है ट्रैक्टर-बोलेरो, एक साथ जानवर-इंसान करते हैं नाव की सवारी

By: Roshan Kumar Jha
July 07, 11:07
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PATNA : आपने फिल्मों में अक्सर देखा होगा कि जहाज पर वाहनों को एक जगह से दूसरे जगह पर ले जाया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी नाव पर ट्रैक्टर, जीप, बोलेरो को पार होते देखा है। अगर नहीं तो आइए आज हम आपको बिहार के उस इलाके की सैर करवाते हैं जहां वाहनों का सफर सड़क के आभाव में पानी के रास्ते तय होता है। 

राजधानी पटना में बैठकर या देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य स्थानों पर रहकर यह यात्रा तय नहीं हो सकती है। ऐसी तस्वीरों की जमीनी हकीकत देखने के लिए आपकों सहरसा-सुपौल का सफर करना होगा। कोसी मैया के नजदीक जाना होगा। तभी आप देख पाएंगे कि यहां के लोग सिर्फ बाढ़ में ही नहीं अपितु सालों भर परेशान रहते हैं। बिहार में भले सुशासन का राज हो लेकिन इस क्षेत्र को इस सुशासन से कोई लेना देना नहीं है। स्थानीय लोगों की माने तो यहां आज भी वहीं हाल है जो दो तीन दशक पहले हुआ करता था। 

अभी कुछ दिन पहले ही हमने लाइव बिहार के दर्शकों को पत्रकार अजय कुमार कोसी की बोलती हुई तस्वीर से उस दर्द को बयां करने का प्रयास किया था कि आखिर क्यों नई नवेली दुल्हन रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद लाल चुनरी ओढ़े बाइक पर बैठकर ससुराल की यात्रा करती है। उस दिन कई लोगों ने कहा कि यह खबर गलत है। लेकिन यह वहां की वास्तविकता है। 

बातें करते करते हम लोग धमहारा घाट और मोहरा घाट पहुंच चुके हैं। देखिए कितनी बारिकी से नाव चालकों ने दो नाव को जोड़कर एक नाव बना लिया है। दोनों नाव के उपर एक पटरी नुमा लकड़ी (जो कि बांस को जोड़कर बनाया जाता है) से बैठने के लिए स्थान बना लिया है। घाट के किनारे जीप, बोलेरो, ट्रैक्टर को बारी बारी से नाव पर चढ़ाया जा रहा है। वहीं एक इसी तरह के नाव पर महिला-पुरुष के साथ-साथ गाय-भैंस को भी उस पार ले जाने की व्यवस्था की जा रही है। 


नाव खुलने का समय हो चुका है। अगर आप भी इस स्पेशल नाव पर बैठना चाहते हैं तो अपना स्थान छेक लीजिए। नहीं समझे स्थान ले लीजिए। नाव चालक ने दमकल को स्टार्ट कर दिया है। नाव धीरे धीरे घाट को छोड़ते हुए बीच पानी में जा रही है। कहीं दूर तक एक आवाज लोगों को सुनाई दे रही है...पुक-पुक-पुक-पुक-पुक...चिंता मत कीजिए कोसी मैया की कृपा रही तो बीच में कुछ नहीं होगा। वरना बिहार सरकार चार लाख की मुआवजा राशि तो देवे करेगी...

नोट : फोटो साभार-अजय कुमार कोसी

 

 

 

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