बिहार में राजद की रणनीति पर भारी पड़ा एनडीए!

बिहार में राजद की रणनीति पर भारी पड़ा एनडीए!

By: Sanjeev kumar
April 16, 03:04
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PATNA:  बिहार विधान परिषद चुनाव के बहाने प्रदेश में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अभी से रणनीति बनाने में जुट गयी है। इसी के मद्देनजर महागठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाने को लेकर जदयू एवं भाजपा ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इस बात के संकेत बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए की ओर से उतारे गये प्रत्याशियों के नामों को लेकर जारी सियासी चर्चाओं से मिल रहा है। राजनीतिक गलियारों में जदयू और भाजपा की ओर से एमएलसी चुनाव के लिए उतारे गये तीन प्रत्याशियों के नामों को लेकर विशेष तौर पर चर्चा गरम है। बताया जा रहा है कि मिशन 2019 के मद्देनजर एनडीए ने एमएलसी चुनाव के लिए संजय पासवान, रामेश्वर महतो और खालिद अनवर को अपना उम्मीदवार बनाकर महागठबंधन को कड़ी चुनौती देने के तैयारी को लेकर एक शुरुआत कर दी है।



गौर हो कि बिहार उपचुनाव के ठीक पहले हिंदुस्तान अवाम मोरचा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने एनडीए का दामन छोड़कर महागठबंधन में शामिल होने का फैसला लेकर सबको चौंका दिया था। जीतन राम मांझी के महागठबंधन में शामिल होने के बाद से ही एनडीए के दलित वोट बैंक में सेंधमारी की चर्चा जोर पकड़ने लगी। बताया जाता है कि राजद के जीतन राम मांझी को महागठबंधन में शामिल कराये जाने के सियासी दांव पर पलटवार के लिए जदयू-भाजपा तभी से प्रयास में जुटी थी।  

इसी कड़ी में बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम के चयन के दौरान एनडीए की ओर से राजद को जवाब देने के लिहाज से महागठबंधन के वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी को अमली जामा पहनाने का प्रयास किया गया।  लिहाजा, जदयू और भाजपा ने एमएलसी चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम के चयन के दौरान मुस्लिम और दलित वोट बैंक का ख्याल रखते हुए संजय पासवान, रामेश्वर महतो और खालिद अनवर को प्रत्याशी बनाने पर अपनी मुहर लगायी।

दलितों के मुद्दे पर विपक्षी दलों के निशाने पर आयी भाजपा की तरफ से विधान परिषद चुनाव के लिए घोषित तीन नामों में से संजय पासवान का नाम काफी चौंकाने वाला है। दरअसल, संजय पासवान बहुत दिनों से सक्रिय राजनीति से दूर थे। संजय पासवान नवादा से सांसद और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। संजय पासवान भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व प्रमुख भी रह चुके हैं। संजय पासवान एक पढ़े लिखे योग्य व्यक्ति हैं। वो दलित राजनीति करते हैं, लेकिन सवर्णों  के बीच भी अपने व्यक्तित्व के कारण स्वीकार्य हैं। दलितों के उत्थान से जुड़े अपने अभियान से सवर्णों को जोड़ देने की उनमें अद्भूत क्षमता है। चर्चा तो यह भी है कि अगर पार्टी ने उन्हें प्रमोट किया होता तो भाजपा के पास आज देश का सबसे प्रभावशाली दलित नेता होता। ऐसे में बताया जा रहा है कि संजय पासवान एनडीए के लिए दलित वोट को जोड़ने में एक अहम कड़ी बन सकते हैं। 

वहीं, विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने से मात्र एक दिन पूर्व रविवार की शाम को जदयू ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा रामेश्वर महतो और खालिद अनवर को अपना उम्मीदवार बनाये जाने की घोषणा की। रविवार को जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने अपने तीनों प्रत्याशियों के नामों का एलान किया। रामेश्वर महतो और खालिद अनवर पहली बार विधान परिषद जायेंगे। मालूम हो कि रामेश्वर महतो पार्टी के प्रदेश सचिव और दरभंगा जिले के प्रभारी हैं। उधर, खालिद अनवर उर्दू अखबार ‘हमारा समाज’ के मालिक हैं। रामेश्वर महतो सीतामढ़ी जिले से तालुल्क रखते हैं और व्यवसाय से जुड़े हैं। कुशवाहा कार्ड के रूप में पार्टी ने इस बार उन्हें उतारा है जबकि मुस्लिम कार्ड के रूप में खालिद अनवर को विधान परिषद भेजने का फैसला किया गया है।

चर्चा है कि इन दोनों प्रत्याशियों के बहाने जदयू कुशवाहा और मुसलमानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। साथ ही महागठबंधन के दलित व मुस्लिम वोट बैंक को कमजाेर करने में इन दोनों नेताओं से मदद मिलने की संभावना जतायी जा रही है। एनडीए के इन सियासी रणनीति के मद्देनजर ऐसा माना जा रहा है कि बिहार में भाजपा व जदयू ने अभी से ही मिशन 2019 की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।

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