नहीं रहे हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार नामवर सिंह, पसरी शोक की लहर

PATNA : नामवर सिंह नहीं रहे। 19 फरवरी की रात 11:40 पर उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले दो तीन दिनों से उनके सारे अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। बस केवल साँस आ जा रही थी । आज शरीर से साँस का रिश्ता भी टूट गया। उन्हें 2 दिन पहले उन्हें हार्ट अटैक भी आया था। वृद्ध शरीर इतनी बीमारियों का बोझ सह नहीं पाया। वे हम सबों को छोड़कर चुपचाप अलविदा कह गए। एक युग का समाप्त होना किसे कहते हैं,आज समझ पा रहा हूँ। विरले लोग होते हैं जो अपने गुरु की उच्चाई तक पहुँच पाते हैं। नामवर सिंह न सिर्फ आचार्य हजारी प्रसाद जैसे आकाशधर्मा गुरु के शिष्य थे, बल्कि वे स्वयं उनकी तरह आकाशधर्मा गुरु भी थे। साहित्य जगत में ऐसा उदाहरण दुर्लभ है।

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उनका होना हम सबों के लिए एक अभिभावक का होना था। आज हिंदी संसार के सबसे बुजुर्ग अभिभावक अनंत में विलीन हो गए। राजेंद्र यादव, कुँवर नारायण,केदारनाथ सिंह,कृष्णा सोबती और अब गुरुदेव नामवर सिंह के जाने के बाद हिंदी संसार बहुत सूना हो गया। चारों तरफ सन्नाटे की आवाज़ सुनाई दे रही है। ‘दूसरी परंपरा की खोज’ करने वाले गुरुदेव अपने पीछे एक बड़ी और समृद्ध परंपरा छोड़ गए। अफ़सोस कि अब हम कभी उनसे ‘वाद विवाद संवाद’ नहीं कर सकेंगे। जीयनपुर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, लोलार्क कुंड, जोधपुर विश्वविद्यालय, राजकमल प्रकाशन, जेएनयू की न जाने कितनी कितनी यात्राओं पर आज पूर्ण विराम लग गया। उनका न रहना कई बार बौद्धिक समाज को रह रह कर याद आएगा। दर्द और बीमारी के बावजूद वे अपनी उसी हल्की ‘नामवरी मुस्कान’ के साथ गए। हिंदी के ‘प्रज्ञवान अजातशत्रु’ को शत शत नमन।

कल उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रखा जाएगा। अंतिम संस्कार 20 feb की शाम या 21 की दोपहर को लोदी शवदाहगृह में होने की संभावना है।