नवादा लोकसभा सीट : कभी भाजपा तो कभी राजद जमाते रहे हैं कब्ज़ा, इस बार लोजपा और राजद आमने सामने

PATNA : नवादा (Nawada) लोकसभा सीट पर आज लोजपा उम्मीदवार चन्दन कुमार ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया जहाँ उनका सीधा मुकाबला राजद प्रत्याशी विभा देवी से होगा। चन्दन कुमार बाहुबली नेता और पूर्ण सांसद सूरजभान सिंह के सबसे छोटे भाई और मुंगेर से मौजूद सांसद वीणा देवी के देवर हैं।बड़े भाई की बाहुबली छवि से अलग चन्दन कुमार बिहार के बड़े कॉन्ट्रैक्ट में गिने जाते हैं। चुनावी दांव में वो अपनी भाभी वीणा देवी पर भारी पड़ गए। चन्दन झारखण्ड के एक बड़े बिल्डर के दामाद हैं और कई राज्यों में उनका बिजनेस फैला हुआ है। चन्दन को उस सीट को निकालने  की जिम्मेदारी मिली है जिसका प्रतिनिधित्व गिरिराज सिंह जैसे हैवीवेट नेता करते हैं।गिरिराज सिंह की नाराजगी मोलकर चन्दन कुमार को ये सीट दी गई है। 

नवादा में चन्दन की प्रतिद्वंदी विभा देवी जेल में बंद राजद के पूर्व विधायक राज्बल्लभ यादव की पत्नी है। राज्बल्लभ यादव 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद के तकत पर विधायक बना था लेकिन नाबालिक से रे’प के जुर्म में सजा मिलने के बड़ा उसकी सदस्यता रद्द कर दी गई। नवादा एक भूमिहार बहुल सीट है जिस पर सीधा मुकाबला भूमिहार बनाम यादव की हो गई है।

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कभ नवादा में वामपंथ भी मजबूत हुआ करता था। 1989 और 1991 में वामपंथी उम्मीदवार इस सीट से जीते। भाजपा पहली बार इस सीट पर पहली बार 1996 में जीती उसके बाद से कभी विनर रही तो कभी रनर। 1998 में राजद के पास ये सीट गई तो फिर 1999 में भाजपा इस ने नवादा जीता। 2004 में राजद के वीरचंद पासवान ने यहाँ कब्ज़ा किया तो फिर 2009 और 2014 में भाजपा ने यहाँ कब्ज़ा किया। 2014 में गिरिराज सिंह यहाँ से 44 .12 फीसदी वोट ले कर विजयी हुए। 2019 में एनडीए में हुए सीट बंटवारे में ये सीट लोजपा के खाते में चली गई और चन्दन कुमार को उम्मीदवार बनाया गया। चन्दन कुमार के पास अब इस बात की चुनौती है कि जिस सीट को  उन्हें  भाजपा के हेविवेट नेता गिरिराज सिंह को नज़रअंदाज कर के दी गई है उसपर एनडीए का कब्ज़ा बरकरार रखना। राजनितिक इतिहास देखे तो चन्दन कुमार और विभा देवी दोनों सियासी पिच पर नए हैं। अब देकना है बाजी कौन मारता है।