नीतीश सरकार के इस फैसले के बाद अब बिहार के फल-सब्जी खाएंगे अमेरिकी और यूरोपीय लोग

Quaint Media

PATNA : बिहार के किसानों के लिए नीतीश सरकार द्वारा बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि फतुहा औद्योगिक क्षेत्र में कृषि उत्पादों के संरक्षण और भंडारण के लिए राज्य का पहला ई-रेडिएशन प्रोसेसिंग यूनिट और पैक हाउस का निर्माण किया जाएगा। नीतीश सरकार ने उद्यमियों के लिए वहां ई-रेडिएशन सामान्य सुविधा केंद्र बनाने का भी फैसला किया है। उद्योग विभाग की इस योजना को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) तकनीकी की मदद से बनाया जाएगा।

मिली जानकारी के मुताबिक़ विभाग ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए 51 करोड़ रुपए का आवंटन भी कर दिया है। वहीँ इसके लिए जमीन का भी आवंटित कर दिया गया है। इस प्रोजेक्ट को अगले 6 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बड़ी योजना से राज्य के फल-सब्जी उत्पादक किसान और स्थानीय उद्यमियों को बहुत फायदा मिलेगा। बताया गया है कि रेडिएशन तकनीक से प्रसंस्कृत होने के बाद प्रदेश से फल-सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थ सीधे अमेरिका और यूरोप के बाजार में भेजे जा सकते हैं।

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बता दें कि सरकार ने औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2016 में खाद्य प्रसंस्करण को प्राथमिक क्षेत्र में रखा है। बिहार के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में काफी संभावना देखी जा रही है। नीतीश सरकार ने कृषि रोडमैप के तहत फल और सब्जी की बर्बादी 30-40 फीसदी कम करने का लक्ष्य रखा है। सरकार के इस बड़े प्रोजेक्ट के चलते जल्द खराब होने वाले फलों की लाइफ बढ़ाने में मदद की जाएगी। इसके तहत रेडियोएक्टिव तकनीक की मदद से फल और सब्जियों जैसी जल्द खराब होने वाली चीजों का न केवल जीवनकाल बढ़ाया जा सकता है बल्कि इससे उत्पादों की गुणवत्ता भी बढ़ाई जा सकती है।

कृषि विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह तकनीक बेहद सफल कारगर हुई है। रेडिएशन प्रोसेसिंग के बाद फसल, फल या सब्जी के खराब होने की संभावना खत्म हो जाती है। गेहूं, चावल, धान में कीट नहीं लगते हैं। इस उपचार के कई प्रभाव होते हैं जिनमें बैक्टीरिया, फफूंद, कीटों को नष्ट करना, फलों के पकने और सड़ने की प्रक्रिया को धीमा करना और अधिक मात्रा में दिए जाने पर अनुर्वरता उत्प्रेरित करना शामिल है।