होली पर दिनभर गालियां सुनते थे पंकज त्रिपाठी, कहा- गुस्सैल लोगों पर सर्जिकल स्ट्राइक करते थे हमलोग

PATNA : सतरंगी दुनिया में रहकर भी ख्याल मटियानी है। गांव की धूरी को अबतक गुलाल समझने वाले चर्चित अभिनेता पंकज त्रिपाठी को फोन लगाया तो उनका शॉट रेडी था लेकिन होली और बचपन का नाम सुना तो ठिठक गए। रन, ओंकारा, मसान, गैंग्स ऑफ वासेपुर, निल बटे सन्नाटा, अनारकली ऑफ आरा, गुड़गांव में दमदार अभिनय और फिल्म न्यूटन के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित पंकज त्रिपाठी होली की याद आते ही मुंबई की चकाचौंध से कुछ पल के लिए अपनी यादों के सहारे गांव की पगडंडी पर उतर आते हैं, कहते हैं, मेरे गांव की होली हमारे लिए बेहद खास थी। यूं कहिये कि होली से ज्यादा हमारे लिए होलिका दहन खास होती थी।

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हमारे गांव में नथुनी महतो थे। हम और हमारे होली गैंग की कोशिश होती थी उनके यहां से कोई भी एक चीज चुराकर होलिका दहन के दिन जला देना और दूसरे दिन दिनभर उनकी गालियां सुनना। हमें उनकी गाली सुनने में बड़ा मजा आता। पंकज बताते हैं यही नहीं हमारी गैंग सर्जिकल स्ट्राइक की तरह गुस्सैल लोगों को टारगेट करती। गांव के तमाम गुस्सैल लोगों की कोई भी एक चीज होलिकादहन में स्वाहा कर देना और अगले दिन उनकी गालियां सुनना। होली के दिन हमारे गांव में फगुआ गाने की परंपरा थी। होली के दिन रंग और गुलाल से भरे हम और हमारे सभी दोस्त होली खेलते और फगुआ गाते। शुरुआत भगवान के गाने से होती। भक्ति रस धीरे-धीरे भौजी के घर तक पहुंचते ही शृंगार रस के फगुआ राग में बदल जाता। हम गाते, जांघ तोरे हवे गोरी केदली के थमवा, जोबना सेनुरिया अमवा…. और पूरी टोली मस्ती में झूमती।