बिहार में नहीं है एक भी हि’न्दू शरणार्थी, फिर भी किया जा रहा ब’वाल, जल्द शुरू होगा NPR

पटना. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि बिहार में एनपीआर का काम 15 मई से शुरू होगा और 28 मई तक चलेगा। यह जनगणना के प्रथम चरण मकान सूचीकरण व मकान गणना के साथ किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री शनिवार को भाजपा दफ्तर में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज एनपीआर 2010 को ही अपडेट किया जा रहा है। कोई नया रजिस्टर तैयार नहीं किया जा रहा है। यह जनगणना का ही हिस्सा है। इसमें न कोई दस्तावेज देना है न प्रमाणपत्र। एनपीआर लागू करना राज्यों की बाध्यता है। कानून बनाने का अधिकार केन्द्र को है। एनपीआर का निर्माण वैधानिक कार्रवाई है, जिससे कोई राज्य इंकार नहीं कर सकता।

मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार के दौरान ही एक अप्रैल 2010 से 30 सितंबर 2010 तक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) बनाने का निर्णय लिया गया। यही नहीं वर्ष 2015 में एनपीआर को आधार से जोड़कर डाटा अपडेट किया गया। ऐसे में यह कहना कि एनपीआर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का निर्णय है, सरासर गलत है। केन्द्र की वर्तमान सरकार तो उसी निर्णय को कार्यान्वित कर रही है।

मोदी ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को राहत देना है। पाकिस्तान में किस तरह धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़त किया जा रहा है, इसका हालिया उदाहरण ननकाना साहिब में जगजीत कौर का अपहरण और उसका धर्मांतरण और फिर इसके बाद पाक मुस्लिमों द्वारा गुरुद्वारा साहिब पर हमला करना है। नागरिकता संशोधन विधेयक ऐसे ही धार्मिक कारणों से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने से संबंधित है। मनमोहन सिंह, सीपीएम नेता प्रकाश करात, बासुदेव आचार्य ने समय-समय पर तीनों देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने की मांग करते रहे हैं। फिर विपक्ष का विरोध क्यों?

मोदी ने कहा कि पाकिस्तान में 1947 में 23 फीसदी हिंदू थे, आज 3.7 फीसदी से भी कम हो गए हैं। जबकि बांग्लादेश में 22 फीसदी से घटकर मात्र 7.8 फीसदी हिंदू रह गए हैं। इसी तरह अफगानिस्तान में 1992 में दो लाख हिंदू-सिख थे, अब 500 भी नहीं हैं। बिहार में भी 1947 में साढ़े तीन लाख हिंदू शरणार्थी आए, जिन्हें चंपारण, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, अररिया, सहरसा, गया, दरभंगा में बसाया गया। इसी तरह 1964 में बड़ी संख्या में म्यामांर से हिंदू शरणार्थी आए, इन्हें भी केन्द्र के निर्देश पर बिहार के कटिहार, पूर्णिया, अररिया और समस्तीपुर में बसाया गया। बिहार सरकार के आदेश पर 2009 में 10536 परिवार के 50238 बंगाली शरणार्थियों का सर्वेक्षण किया गया। इसमें 90 फीसदी से अधिक दलित और अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोग हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एनआरसी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि एनआरसी पर अभी कोई चर्चा नहीं हो रही है। यह पूछे जाने पर कि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कई अवसरों पर इसको लेकर चर्चा की है और इसके लागू होने का दावा किया है, उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम के बयान के बाद सारी चीजें स्वत: स्पष्ट हो गयी है।