चर्चा का विषय बना शादी कार्ड, आप इसे सदियों तक संजो कर रख सकते हैं

चर्चा का विषय बना शादी कार्ड, आप इसे सदियों तक संजो कर रख सकते हैं

By: Roshan Kumar Jha
July 11, 14:07
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PATNA : किसी की शादी है इसका पता निमंत्रण पत्र से चलता है लेकिन कुछ निमंत्रण पत्र खास होते हैं, मानो कोई पांडुलिपि हो - एकदम सदियों तक संभालकर रखा जाने वाला।

हर किसी की चाहत रहती है कि हमारी ‘शादी’ यादगार बने। शादी में जब मेहमान आएं तो व्यवस्थाएं देखकर दंग रह जाएं। हम भारतीय अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए क्या कुछ नहीं करते हैं। अपने बच्चों की शादी के लिए माता-पिता अपने जीवन की सारी पूंजी तक न्यौछावर कर देते हैं। एक से बढ़कर एक खाने की आइटम, शादी की सजावट, गहने-कपड़े और खासकर शादी का निमंत्रण पत्र।

हर कोई चाहता है कि उसकी शादी का निमंत्रण पत्र कुछ खास हो, कुछ अलग हो और इसके लिए कुछ लोग एक्सपेरिमेंट करने से भी गुरेज नहीं करते। निमंत्रण पत्र की खूबी यह भी है कि इसमें वैवाहिक कार्यक्रमों के अलावा विभिन्न सामाजिक संदेशों के जरिए समाज को जगाने की कोशिश की जाए। अपनी परंपरा और लोक संस्कृति की झलक हो। निमंत्रण पत्र पढते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाए, मन मचलने लगे कि इस विवाह समारोह में तो जरुर जाना है।

ऐसा ही एक निमंत्रण पत्र इन दिनों मेरे गांव ‘मोकामा’ में चर्चा का विषय बना हुआ है। वह भी 19 वर्ष पूर्व हुई शादी का निमंत्रण पत्र।

इस निमंत्रण पत्र में न कहीं गणेश की प्रतिमा है और ना ही ‘मंगलम भगवान विष्णु’ जैसे मंत्र बल्कि इसमें मंत्र के कामायनी की पंक्‍तियां उद्धृत हैं और गणेश की जगह अजंता की प्रस्तर प्रतिमा। और भी बहुत कुछ जो आपको अचंभित करेगा।

वर्ष-1999 शरत सांकृत्यान की शादी थी तो उनके पिताजी डॉ (प्रो.) जर्नादन प्रसाद सिंह ने बेटे के विवाह का निमंत्रण पत्र ऐसा छपवाया कि आज तक उसकी चर्चा है।
कुछ विशेषताओं पर गौर करें -

जहां ‘मंगलम भगवान विष्णु’ जैसा मंत्र लिखा जाता है वहां उन्होंने कामायनी की पंक्‍ति ‘सत्य ही रहता नहीं यह ज्ञान-तुम कविता, कुसुम या कामिनी हो।’ इन पंक्‍तियों के ऊपर अजंता की प्रस्तर प्रतिमा जो आप संलग्‍न फोटो से देखकर समझ सकते हैं। इसी प्रकार आगे के पन्‍नों पर है - बारात सजेगी, बाजे बजेंगे, द्वाराचार होगा, गलसेंकी होगी, विविध मिष्ठान, शरबत-ठंडई, पान सुपारी से स्वागत का आयोजन है-इत्र, फाहे गमकेंगे-हास्य विलास होगा।

रात्रि में मृगशिरा नक्षत्र में कन्यादान होगा, तदुपरांत सिन्दूरदान-सप्‍तपदी होगी। अठंगर कुटाएगा, कमरखोलाई होगी, खिरखिलायी होगी।

इस बारात में शामिल होने वाले बारातियों को बताया गया है कि खाने में क्या होगा। हमारे बिहार में पहले विवाह के बाद वाले दिन बारात पक्ष को लड़की वाले भात खिलाते थे, अब यह परंपरा न के बराबर है।

तो निमंत्रण पत्र में लिखा गया है -
दोपहर में भातखय है
भात गमकउआ है
दाल अरहर है
घी अहगर है
विदुर का शाक है
छान्दस परिपाक है
मुक्‍त दधिलेप है
सूचना संक्षेप है
भांड़ी और गाली सब है....

डॉ जेपी सिंह यह भी जानते हैं कि इस विवाह के पश्‍चात जो अगली पीढी आएगी वह भी अपना रोशन करेगी। इसलिए वे लिखते हैं।
अवश्य ही इनका दामपत्य
असाधारण होगा
काव्यात्म होगा
दिव्य से दिव्यतर होगा
लोक कल्याणकारी एवं लोकार्पित होगा
इनकी सन्ततियां करेंगी स्वयं को प्रमाणित
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्यों में।

तो अगली बार जब आप भी कोई निमंत्रण पत्र छपवाएं तो कुछ अलग करें जैसा हमारे मोकामा वाले डॉ जेपी सिंह जी ने अपने शरत की शादी पर किया था।

साभार : प्रियदर्शन शर्मा, पत्रकार

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