बिहार के भोजपुर से नासा तक: महान गणितज्ञ वशिष्ठ बाबू के लिए पटना विश्वविद्यालय ने बदला था नियम

PATNA: भारत का नाम विश्व में रोशन करने वाले बिहार के महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरूवार सुबह निध’न हो गया। वशिष्ठ नारायण सिंह को सदी के महान गणितज्ञों की सूचि में रखा जाता है। वशिष्ठ नारायण सिंह ने नासा में तक अपनी सेवाएं दीं। उनका एक ऐसा किस्सा जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

वशिष्ठ नारायण सिंह ने वर्ष 1958 में बिहार मैट्रिक बोर्ड की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया था। इसी के साथ ही हायर सेकेंड्री की परीक्षा में भी उन्हें सर्वोच्च स्थान मिला। साल 1964 में पटना विश्वविद्यायल ने वशिष्ठ बाबू के लिए अपना कानून तक बदल दिया और इन्हें सीधे ऊपरी कक्षा में दाखिला दिया। वहां से वशिष्ठ नारायण सिंह ने B.Sc गणित आनर्स की परीक्षा में भी सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।

बता दें सितंबर 1965 में वशिष्ठ बाबू को बर्कले विश्वविद्यायल से आमंत्रण मिला। जहाँ उन्हें जीनियसों का जीनियस कहा गया। इतना ही नहीं वशिष्ठ बाबू अमेरिका गए और नासा में भी काम किया। 1967 में सिंह को कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स का निदेशक बनाया गया।

वहीँ इतने महान व्यक्ति के निधन के बाद पीएमसीएच ने उनको एक एम्बुलेंस भी देने से मना कर दिया। जिसके बाद अस्पताल और साथ ही नीतीश सरकार की भी आलोचना हुई।

महान गणितज्ञ के किस्से: जब कॉलेज में वशिष्ठ बाबू ने अपनी प्रतिभा का लोहा खुद मनवाया