नीतीश के नाम पर भाजपा को नहीं मिलेगा मुस्लिम-दलित वोट, लोस चुनाव में क्लीन स्वीप मुश्किल

नीतीश के नाम पर भाजपा को नहीं मिलेगा मुस्लिम-दलित वोट, लोस चुनाव में क्लीन स्वीप मुश्किल

By: Roshan Kumar Jha
May 16, 11:05
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PATNA : एक दौर था जब इंदिरा इज इंडिया ,इंडिया इज इंदिरा के नारे को देश में स्थापित करने के लिए संवैधानिक संस्थानों का या तो माखौल उड़ाया जा रहा था या फिर हां में हां मिलाने को मजबूर किया जा रहा था उदेश्य एक ही था विपंक्ष मुक्त भारत बनाना इस उदेश्य को पूरा करने के लिए इंदिरा गांधी और उनके सिपहसलार क्या क्या किये कहने कि जरुरत नहीं है और उसका क्या परिणाम हुआ इतिहास के पन्नों में दर्ज है ।


आज एक बार फिर देश को उसी दिशा में ले जाने कि कोशिश हो रही मोदी इज शाह, शाह इज मोदी बराबर कांग्रेस मुक्त भारत और इस नारे को स्थापित करने के लिए ये दोनों जोड़ी भी उसी अंदाज में काम कर रही हैं जिस अंदाज में कभी इंदिरा गांधी और उनकी पूरी टीम किया करती थी ।

सुप्रीम कोर्ट में कौन जज बनेगा, सेना का अध्यक्ष कौन होगा सब कुछ इंदिरा गांधी के आवास से तय होता था वो सब परम्परा और संवैधानिक मान्यताओं को नजरअंदाज करके किया जाता था जिस किसी भी राज्य और संस्था से विरोध के स्वर उभरे उस राज्य और संस्था का खैर नहीं था सीबीआई ,आईटी, सुप्रीम कोर्ट, राज्यपाल, राष्ट्रपति और मीडिया का हाल ऐसा लग रहा था कि सब कुछ इंदिरा गांधी के अंगूलियों पर नाच रहा हो।


ठिक वैसी ही स्थिति कांग्रेस मुक्त भारत करने कि ललक के कारण बनती जा रही है हर सिस्टम को चुनौती देने कि कोशिश हो रही है जो हां में हां नहीं लगा रहा है उस मीडिया हाउस या फिर संवैधानिक संस्थान या फिर राजनैतिक दल को परेशान किया जा रहा है , औऱ यही वजह है कि दोस्त से ज्यादा दुश्मन बनता जा रहा है कर्नाटक में सरकार बनाने कि जो जिंद मोदी और शाह ने कल के भाषण के सहारे दिखाने कि कोशिश किये हैं तय मानिए बीजेपी के लिए सरकार बनाने कि राह में और मुश्किलें खड़ी हो गयी है, राज्यपाल का सब कुछ दाव पर लग गया है सरकार बने इसके लिए तमाम संवैधानिक प्रावधानों को नजरअंदाज करना होगा तोड़जोड़ का खेल कराया जायेगा पैंसा से लेकर कई संस्थानों का दुरउपोयग किया जायेगा इस प्रवृति सत्ता आप भले पा लिजिए लेकिन इसका दुरगामी प्रभाव बहुत ही बूरा होता है ।

नीतीश कुमार के रास्ते से हटने के बाद 2019 तक जहां कोई चुनौती नहीं दिख रहा था लेकिन देखिए किस तरीके से विपंक्ष गोलबंद हो रहे हैं झारखंड के राज्यसभा चुनाव को देखिए कांग्रेस उम्मीदवार को हराने के लिए एड़ी चोटी एक कर दिये सारे मशीनरी को दाव पर लगा दिये क्या हुआ मुंह खानी पड़ी, याद करिए अहमद पटेल राज्यसभा में नहीं पहुंचे उसके लिए अमित शाह रात के दो बजे तक दाव लगाते रहे क्या हुआ इस तरह के प्रवृति से सिस्टम भी प्रतिक्रियावादी होने लगता है क्यों कि बहुत कुछ आप कर नहीं सकते हैं सिस्टम में भी अपने शर्तों में काम करने वाले लोगों कि अभी भी बहुत संख्या है, झारखंड हाईकोर्ट से लालू प्रासद को राहत मिलना भी इसी प्रतिक्रिया का परिणाम माना जा रहा है इसलिए अभी भी वक्त है कि इस तरह कि राजनीत से बचा जाये नहीं क्या स्थिति है आज राहुल को पप्पू कहने से अब लोग घबरा रहे हैं मीडिया जो बोल ले लेकिन राहुल अपनी सौम्यता के सहारे ही धीरे धीरे कदम दर कदम आगे बढ रहा है कर्नाटक आप जीते नहीं है जीतने कि कोशिश में आप जेडीएस और उनके समर्थकों के साथ दो दो हाथ करने का मूड बना रहे हैं जैसे यूपी में बैंठे बिठाए कांग्रेस, सपा, बसपा और अजीत सिंह कि पार्टी एक मंच पर आ गया विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव में बसपा टूट गया लेकिन आप कांग्रेस को तोड़ने में कामयाब नहीं हुए संदेश को समझिए ,बिहार में भी लालू के साथ जो हो रहा है नीतीश साथ रहे या फिर नीतीश को अलग लड़ने को तैयार कर ले 2019 का लोकसभा चुनाव में आप 2014 को दोहरा नहीं सकते हैं ये तय है फिर आपका जो अपने सहयोगी दल के साथ जो व्यवहार है 2019 में समीकरण बदल जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगा सरकार में नीतीश के साथ है नीतीश फ्री हेंड नहीं दे रहे हैं जो सहायता राशी मिलनी चाहिए था वो भी नहीं मिल रहा है ।

वहीं सुशील मोदी लालू के खिलाफ हमलावर रुख जारी रखते हुए नीतीश कुमार को हासिए पर भेजने में लगे हैं ऐसे में दोनों साथ साथ है भी और साथ साथ नहीं भी है वैसे ये भी तय है कि नीतीश के चहरे पर बिहार में बीजेपी को मुस्लिम और दलित का वोट मिलने वाला नहीं है रही बात अति पिछड़ों का है तो उस पर राजद कि हिस्सेदारी बढती जा रहा है ये सब इसलिए हो रहा है कि कांग्रेस मुक्त भारत के चक्कर में मोदी और शाह कई ऐसे फैसले ले रहे हैं जिसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा ।


कल ही कर्नाटक के जीत के जश्न के दौरान मोदी भाषण के क्रम में जिस तरीके से ममता पर हमला किये और मीडिया का एक बड़ा वर्ग ममता को भिलेन बनाने में लगा है क्या होगा सबके सब साथ हो जायेगे उड़ीसा में भी ऐसी ही स्थिति बनती जा रही है शाह और मोदी को ये महसूस ही नहीं हो रहा है कि इनकी जीत कि कुंजी विपंक्ष और कांग्रेस का अलग अलग लड़ना है साथ आ गये तो फिर बूथ मैनेजमेंन्ट से लेकर पैसे का जोड़ सब हवा हवाई हो जायेगा।

साभार : संतोष सिंह, संपादक, कशिश न्यूज चैनल

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