सोनिया को सता रही ये बड़ी चिंता, डिनर पर BJP के खिलाफ बनाएंगी रणनीति, तेजस्वी भो होंगे शामिल

सोनिया को सता रही ये बड़ी चिंता, डिनर पर BJP के खिलाफ बनाएंगी रणनीति, तेजस्वी भो होंगे शामिल

By: Sudakar Singh
March 13, 02:15
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Live Bihar Desk: कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष तैयार करने के लिए 17 विपक्षी पार्टियों के नेताओं के लिए डिनर का आयोजन किया है। बिहार-झारखंड के कई नेता भी उनके साथ डिनर करने पहुंचेंगे। पूर्व उप मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, हाल ही में एनडीए छोड़ महागठबंधन में शामिल हुए जीतन राम मांझी समेत कई नेता डिनर में भाग लेंगे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अभी साफ नहीं हो पाया है कि वे शामिल हो पाएंगे या नहीं।  


वैसे तो सोनिया हर साल डिनर का आयोजन करती हैं, मगर इस बार के आयोजन का महत्व काफी ज्यादा है। इस डिनर को 2019 के चुनाव के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। सोनिया गांधी को ये चिंता सता रही है कि अगर आगामी चुनाव में कोई तीसरा मोर्चा खड़ा हो गया तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होगा। यही कारण है कि सोनिया सभी विपक्षी दलों को एक साथ लाना चाहती हैं।


बिहार के संदर्भ में बात करें तो राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद बीजेपी विरोधी दलों को एकजुट करने में काफी मेहनत कर रहे हैं। हालांकि वे अभी चारा घोटाला मामले में सजा पाने के बाद जेल में बंद हैं। इस काम को करने के लिए उनके बेटे तेजस्वी यादव ने जी-जान लगा दिया है। यही कारण है कि सोनिया गांधी द्वारा आयोजित डिनर में तेजस्वी यादव भाग लेने के लिए काफी उत्सुक हैं।


वहीं इस डिनर को लेकर बिहार की सियासत भी गरमाई हुई है। बीजेपी-जदयू नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री गिरि‍रा‍ज सिंह ने डिनर को लेकर तंज कसते हुए कहा था कि सोनिया गांधी गिरती हुए शाख को बचाने की कोशिश में लगीं हैं। वे लालू से मिलने जेल भी जा सकती है, लेकिन शाख उसी की बचेगी जिसको जनता चाहेगी। 


सोनिया गांधी के डिनर पर विरोधियों का जवाब देते हुए राजद नेता एज्या यादव ने कहा कि लालू प्रसाद चाहते थें कि बीजेपी विरोधी पार्टियां एक साथ आए और एनडीए के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार करे। सोनिया गांधी इस काम को आगे बढ़ा रहीं हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। नीतीश और सुशील मोदी को उनकी लोकप्रियता देखकर घबराहट हो रही है। 


सियासी बयानबाजी जो भी हो मगर देखने वाली बात होगी कि राहुत गांधी के नेतृत्व में बीजेपी के खिलाफ कितनी पार्टियां एक एकजुट हो पातीं हैं। राहुल गांधी जब से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं तब थे ये सवाल उठने लगा है कि क्या उनके नेतृत्व में कांग्रेस मजबूत हो पाएगी।  
 

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