SC-ST एक्ट मामले पर 'सुप्रीम' फैसला, प्रथम दृष्टया आरोप साबित नहीं होने पर मिले अग्रिम जमानत

SC-ST एक्ट मामले पर 'सुप्रीम' फैसला, प्रथम दृष्टया आरोप साबित नहीं होने पर मिले अग्रिम जमानत

By: Sudakar Singh
August 10, 07:46
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Live Bihar Desk : एससी-एसटी एक्ट को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने आते दिख रहे हैं। इस एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बेअसर करने के लिए केंद्र सरकार ने संशोधित बिल को संसद में पास करवाया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के एक मामले पर सुनवाई करते हुए  कहा कि एससी-एसटी एक्ट के तहत आरोपी के खिलाफ यदि प्रथम दृष्टया केस नहीं बनता है तो अदालतें ऐसे आरोपी को अग्रिम जमानत दे सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संशोधित बिल पर असर पड़ेगा। शिकायत पर आरोपी को गिरफ्तार तो किया जाएगा, मगर जमानत मिलने का उसके पास रास्ता भी होगा। इससे झूठे आरोप लगाने के मामले में आरोपी को राहत मिलेगी। बिहार का चर्चित निखिल प्रियदर्शी रेपकांड का मामला भी इसी एक्ट के तहत चल रहा है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। 

इस मामले में पीड़ित लड़की के आदिवासी होने के कारण केस को आईपीसी के साथ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ ने अग्रिम जमानत देने का आदेश इस मामले के एक आरोपी मृणाल किशोर की याचिका पर दी। इस केस पर सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने वकील मनीष कुमार ने कहा कि एससी-एसटी कानून में केंद्र सरकार ने संशोधन बिल पास किया है, जिसमें आरोपी  को अग्रिम जमानत नहीं देने का प्रावधान है।

इस पर पीठ ने सहमति जताते हुए कहा कि हमें इससे कोई मतलब नहीं है। जब अभियुक्त के खिलाफ पहली नजर में कई केस नहीं बात है तो उसे जमानत मिलनी चाहिए। पीठ ने कहा कि एक्ट की धारा-18 में साफ है कि यदि आरोपी के खिलाफ पहली नजर में मामला नहीं बनता है तो उसे अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए।

पीठ ने कहा कि एफआईआर में आरोपी का नाम नहीं है। न ही लड़की ने उसका नाम सीआरपीसी की धारा-164 के बयान में लिया है। पुलिस डायरी में यदि आरोपी का नाम आया है तो उसे ट्रायल में देखा जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने मृणाल किशोर को जमानत दे दी।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट एससी-एसटी एक्ट को लेकर बड़ा फैसला लिया था। इस फैसले में अग्रिम जमानत देने, तुरंत गिरफ्तारी न करने, पहले प्रारंभिक जांच करने और जनसेवकों के मामले में गिरफ्तारी से पूर्व अनुमति हासिल करने के आदेश दिए गए थे। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के विपरीत एससी-एसटी संशोधित बिल संसद में पास करवा लिया है।   

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