नेपाल में भारी बारिश की संभावनाओं के बाद रेड अलर्ट जारी,बिहार में बाढ़ पीड़ितों की चिंता बढ़ी

PATNA: नेपाल सरकार ने अपने देश में भारी बारिश होने की संभावना जताते हुए रेड अलर्ट जारी कर दी है। इससे बिहारवासियों की चिंता बढ़ गयी है। गौरतलब है कि नेपाल में बारिश ज्यादा होती है तो वहां की सरकार भारत की ओर पानी को भेज देती है। इसके कारण लगभग आधा बिहार बाढ़ में डूब जाता है। यही कारण है कि आशंका जतायी जा रही है कि बाढ़ में डूबे बिहार में नेपाल द्वारा फिर से पानी छोड़ा जाएगा तो क्या होगा?

नेपाल में बनाना पड़ेगा डैम

कांग्रेस नेता सदानंद सिंह ने कहा है कि नेपाल में कई दिनों से मूसलाधार बारिश हो रही है। नेपाल की तराई वाले क्षेत्र से पानी, नीचे बिहार की ओर आता है, जिससे राज्य में बाढ़ जैसी उत्पन्न हो गयी है। उन्होंने बाढ़ की समस्या से स्थायी तौर पर निपटने के बारे में बताया कि जब तक नेपाल में चेकडैम का निर्माण नहीं होगा, तब तक बिहार को बाढ़ जैसी गंभीर आपदा से छुटकारा नहीं मिलेगा।

Badh in Bihar

सदानंद सिंह का कहना है कि यह अंतर्राष्ट्रीय मामला है और इसके लिए भारत सरकार को आगे आना होगा और नेपाल में चैकडेम बनाना होगा। गौरतलब है कि हाल ही में नेपाल ने 1700 क्यूसेक से अधिक पानी भारत की ओर छोड़ा है, जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित बिहार राज्य हुआ है। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि इस बार नेपाल से सामान्य से आठ गुना ज्यादा पानी छोड़ा गया है इसलिए राज्य में बाढ़ से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गयी है।

बाढ़ की समस्या से जूझता बिहार

बिहार के 12 जिलों के 68 प्रखंडों के 444 गांव के करीब 20 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ प्रभावित जिलों में सीतामढ़ी, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, अररिया, सुपौल, मधुबनी, शिवहर, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, सहरसा, कटिहार, मोतिहारी, पूर्णिया शामिल है। बाढ़ के कारण अबतक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। आपको बता दें कि गैर-अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 200 लोगों की मौ’त बाढ़ के कारण हो चुकी है। इतना ही नहीं, लाखों लोगों का घर डूब गया। ये लोग अपना घर और गांव छोड़कर सड़कों पर भूखे पेट रहने को मजबूर हो गये हैं। इन लोगों को पानी के बीच एक एक दिन और रात गुजारना मुश्किल हो रहा है।