राष्ट्रपति ने बिहार के रामचंद्र माझी को किया सम्मानित, मिला संगीत नाटक पुरस्कार

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Patna: नई दिल्ली में बिहार के सारण जिले के रामचंद्र माझी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2017 से सम्मानित किया गया है। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 93 साल की उम्र के रामचंद्र माझी को यह पुरस्कार अपने हाथों से प्रदान किया। उन्हें ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया गया। रामचंद्र माझी ने बिहार के लोक नाटक के क्षेत्र में सालों से अहम योगदान दिया है। वो भिखारी ठाकुर की नाच मंड़ली में काम करने वालों मे से एक है। इस अवस्था में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलना सारण के लिए काफी गौरव की बात़ है। जिले के खैरा रे समीप एक छोटे से गांव तुजारपुर के निवासी रामचंद्र माझी सारण के युवा लोक कलाकारों के लिए प्रेरणा है।

तो वहीं भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की नाट्य यात्र के सहजीवी रामचंद्र मांझी 92 साल की उम्र में भी मंच पर जमकर थिरकते और अभिनय करते हैं। भिखारी ठाकुर की परंपरा को आगे बढ़ाने वालों का सहयोग भी कर रहे हैं। रामचंद्र मांझी का कहना है कि मैंने वह दौर देखा जब सिनेमा की पहुंच आम लोगों तक नहीं थी, भिखारी ठाकुर की मंडली का नाच देखने लोग दूर-दूर से आते थे। मैं नारी की भूमिका निभाता था। बिदेसिया में वेश्या का अभिनय करता था।

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रामचंद्र मांझी को आज के दौर से शिकायत है। वह बताते हैं कि मालिक (भिखारी ठाकुर) कहते थे कि कलाकार सबका है, इसलिए सबको ध्यान में रखकर प्रस्तुति देनी चाहिए। शरीर से कपड़े उतारने पर परिवार के साथ बैठे लोग असहज हो जाते हैं। बड़े-बड़े साहब लोगों ने हमारा नाच देखा है। रामचंद्र मांझी के मित्र जैनेंद्र स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में शोधार्थी हैं। जैनेंद्र बताते हैं कि रामचंद्र मांझी ने हेलेन और सुरैया के साथ भी प्रस्तुति दी थी। वह विभिन्न जगहों पर भिखारी ठाकुर के साथ जाते थे।