पूरे देश में होली ख़त्म होती है तब रंगपंचमी पर इंदौर डूबता है रंगों के सैलाब में

PATNA : जब सारे देश से होली (Holi) का खुमार उतर जाता है तब मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में रंगों की मस्ती चढ़ती है। दरअसल होली के 5 दिनों बाद आती है रंगपंचमी। रंगपंचमी पर सबसे अलग नज़ारा होता है मध्य प्रदेश के इंदौर का। रंगपंचमी पर जो नज़ारा इंदौर में देखने को मिलता है वो कहीं और देखने को नहीं मिलता। देश के अलग अलग हिस्से में एक महीने पहले से ही होली की मस्ती शुरू हो जाती है और होली के साथ कह्तं हो काटी है लेकिन इंदौर में रंगपंचमी होली  का आखिरी पर्व होता है। 

चैत्र मास की पंचमी तिथि को मनाया जाता है इसलिए इसे रंगपंचमी कहते हैं। रंगपंचमी पर फाग यात्रा निकलती है। इंदौर के अलावा भोपाल और मध्य प्रदेश के दुसरे शहरों में भी फाग यात्रा निकाली जाती है। एक दुसरे को रंगों से सराबोर करने की होड़ लगी रहती है। सड़कों पर ढोल नगाड़ों के साथ लोगों का हुजूम होता है और फिजा में उडती है रंगों की बहार। गीत और संगीत की धुनों पर थिरकते लोगों की शक्ल  रंगारंग जुलूस शहर के अलग-अलग हिस्सों से गुजरते हुए ऐतिहासिक राजबाड़ा के सामने पहुँचता है। हर तरफ से रंगों इ बरसात होती है।

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रंगपंचमी मनाने के पीछे धार्मिक मान्यता ये है कि हवा में उड़ते रंग और गुलाल सात्विक गुणों को बढ़ावा देते हैं। रंग गुलाल उड़ाने से देवी देवता प्रसन्न होते हैं। बैंड बाजों के साथ टैंकरों से उड़ते हुए रंग और गुलाल लोगों को तर बतर करते रहते हैं।  अपने पराये का भेद मिल जाता है,  अमीर गरीब, गोर काले सब प्रेम के रंगों में सराबोर दीखते हैं। इंदौर में रंगपंचमी की शुरुआत तब हुई थी जब होलकर वंश का शासन था। होली के पांचवे दिन होलकर राजघराने के लोग आम जनता के सतह होली खेलने सड़कों पर निकलते थे। मकसद होता था समाज के हर तबके को एक रंग में रंग देना। तब से आज तक ये परंपरा यूँ ही जारी है।