राज्यसभा में भी मैथिली भाषा का प्रयोग कर सकेंगे सांसद, उपराष्ट्रपति ने बहाल की नई सुविधा

राज्यसभा में भी मैथिली भाषा का प्रयोग कर सकेंगे सांसद, उपराष्ट्रपति ने बहाल की नई सुविधा

By: Roshan Kumar Jha
July 11, 12:10
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PATNA : बिहार की एकमात्र संवैधानिक भाषा का प्रयोग अब लोक सभा के साथ-साथ राज सभा में किया जा सकेगा। अब अगर कोई एमपी अपनी बातों को मैथिली भाषा में रखना चाहेंगे तो अब उनको परेशानी नहीं होगी। बताया जा रहा है कि राजसभा में अनुवादक बहाल नहीं होने के कारण मान्यता प्राप्त होने के बाद भी कुछ भाषाओं में प्रश्न नहीं पूछा जा सकता था।


उपराष्ट्रपति सह राज सभा के सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि मातृभाषा का स्थान सर्वोपरी है। यही एक साधन है जिसकी मदद से लोग बिना हिचक के अपनी बातों को रख सकते हैं। इसलिए सदन में पांच और भाषाओं-डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, संताली और सिंधी में सदस्यों के वक्तव्यों के तत्‍काल अनुवाद की सुविधा भी उपलब्ध करायी गयी है। राज्यसभा सदस्य इस महीने की 18 तारीख से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में 22 अनुसूचित भाषाओं में से किसी में भी अपनी बात रख
सकेंगे।

गौरतलब है कि 22 भाषाओं में से 12 के लिए तत्काल अनुवाद की सुविधा मौजूद थी जिनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी,
गुजराती, कन्नड़, मलयालयम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल और उर्दू शामिल थे।

पांच करोड़ से अधिक है मैथिली भाषा बोलने वालों की संख्या
मिथिला क्षेत्र का उल्लेख रामायण काल से ही मिलता है। कहा जाता है कि जिस समय साहित्य जगत में मात्र संस्कृता भाषा और उनके जानकारों का अधिपत्य था, उस समय कवि कोकिल विद्यापति ने देसल वयना जब जन मिट्ठा का संदेश देते हुए भारतीय भाषाओं को जीवित करने का नारा बुलंद किया था। मिथिला के राजा जनक और उनकी पुत्री सीता का उल्लेख सम्मान के साथ लिया जाता है। एक आंकड़े के अनुसार मैथिली भाषा प्रयोग करने वालों की संख्या करोंड़ों में है। मैथिली भाषा बिहार की एक मात्र संविधान में मान्यता प्राप्त भाषा है।

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