राजद ने साधा केंद्र सरकार के विज्ञापनों पर निशाना, कहा – विकास देखना है तो अखबारों में देखो

PATNA : बिहार में प्रमुख विपक्षी दल राजद (RJD) ने केंद्र सरकार के विज्ञापनों पर निशाना साधते हुए कहा है कि विकास देखना है तो अखबारों में देखो आपने आस पास नहीं। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही अखबारों के पन्ने केंद्र सरकार की योजनाओं से भरे रहते हैं। कुछ अखबारों के पन्नों की तस्वीरों को ट्वीट कर राजद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा।  राजद के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया “विकास देखना है तो अपने आसपास नहीं, अखबारों में देखें! आजकल विकास वहीं पसरता है!”  

केंद्र सरकार अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे कि उज्जवला योजना, आयुष्मान भारत योजना, सौभाग्य योजना का काफी प्रचार प्रसार कर रही है।  सरकारी विज्ञापनों पर विपक्ष सवाल भी उठा रहा है और कह रहा है कि जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे विज्ञापनों में उडाये जा रहे हैं। चुनाव नजदीक आते ही अखबार सभी पार्टियों के विज्ञापनों से भरे रहते हैं। उसी को लेकर राजद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष आरोप लगाते रहा है कि पिछले 5 सालों में विपक्ष के नाम पर कुछ नहीं हुआ जबकि भाजपा विकास को मुद्दा बनाती रही है।

लालू यादव के छोटे बेटे और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार को मीडिया और पत्रकारों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने पत्रकारों के लिए पत्तलकाल और पत्तलचाट जैसे संबोधनों प्रयोग किया। तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा कि “नरेंद्र मोदी नहीं थे तो सेना में शौर्य और पराक्रम नहीं था एवं नरेंद्र मोदी नहीं रहेंगे तो सेना पराक्रमी नहीं रहेगी। बिकाऊ मोदी मीडिया ने यह फ़िज़ूल और बेहूदा तर्क क्या “गुजरात स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म” से सीखा है? पत्तलचाट पतलकार दलालों, शर्म करो और श्रम करो।” वायुसेना द्वारा पाकिस्तान पर हुए एयर स्ट्राइक के बाद देश की सियासत में बवाल मचा हुआ है। एयर स्ट्राइक के बाद मीडिया ने आंकड़ा जजारी कर के बताया कि स्ट्राइक में 300 आतंकी मारे गए हैं उसके बाद भाजपा नेताओं  ने भी बढ़ा चढ़ा कर आंकड़े पेश करना शुरू कर दिया। इसी बीच कुछ नेताओं ने एयर स्ट्राइक पर सवाल उठा दिए और मारे गए आतंकियों के सबूत मांगने लगे। वैसे पत्रकारों और मीडिया पर नेताओं की बदजुबानी का  ये पहला मामला नहीं है। पक्ष और विपक्ष दोनों पार्टियों द्वारा पत्रकारों और मीडिया को निशाना बनाया जाता रहा है।