नीतीश सरकार की योजनाएं हो रही नाकाम, सड़क पर मौजुद गड्ढों ने ली 15000 लोगों की जान

Patna: देश में हर साल हजारों की संख्या में लोग सड़क हादसे का शिकार होते है। जिसमें से कई लोगों की जान चली जाती है तो कई लोग शारीरिक रूप से विकलांग हो जाते है। इन सभी सड़क हादसों का एक मुख्य कारण सड़क पर मौजुद गड्ढें है। इस पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले पांच सालों में सड़कों पर बने गड्ढों की वजह से 14,926 लोगों की जान जा चुकी है। तो वहीं 2017 में  कुल सड़क हादसों से करीब सवा लाख लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में जल्द से जल्द सड़क सुरक्षा से संबंधित तमाम चिजों पर ठिक से ध्यान दिया जाए।

दरसल देश में सड़क सुरक्षा से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सड़कों पर गड्ढों का मुद्दा उठा था। जिस को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। इस पर जस्टिस मदन बी लोकूर, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि सड़कों पर गड्ढों के कारण जान जाने वाले लोगों का आंकड़ा संभवत: सीमा पर या आतंकवादियों द्वारा ली गई जान से भी ज्यादा है। पीठ ने कहा कि 2013-17 के बीच सड़कों पर गड्ढों के कारण गई जान का आंकड़ा यही दिखाता है कि संबंधित प्राधिकारी सड़कों का रखरखाव सही तरीके से नहीं कर रहे हैं।

तो वहीं कोर्ट की एक पीठ ने इस तरह की असामयिक हादसों को भयावह बताते हुए शीर्ष अदालत की समिति से सड़क सुरक्षा के बारे में गौर करने का अनुरोध किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह बात जग जाहिर है कि इस तरह के हादसों में बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है और इसके जिम्मेदार सड़कों के रखरखाव करने वाले वो प्राधिकारी है, जो अपना काम ठीक तरह से नहीं कर रहे हैं। इस लिए उन सभी प्राधिकारियों पर जल्द से जल्द कारवाई हो और सड़क सुरक्षा से संबंधित तमाम चिजों पर ठिक से ध्यान दिया जाए। आपको बता दें की पिछले साल हुए सड़क हादसों में बिहार भी टॉप 10 में है। जहां सिर्फ बिहार में ही करीब 5429 लोगों की सड़क हादसे के कारण जान जा चुकी है।

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