बच्चे कीड़े-मकोड़े की तरह म’र रहे हैं, ऐसे बिहार पर सिर्फ नीतीश कुमार गर्व कर सकते हैं-शिवानंद

PATNA: चमकी बुखार से मरने वाले सभी बच्चे कुपोषित और गरीब घर के हैं। वहीं उसी गांव के अमीर लोगों के घरों में इस तरह की बीमारी की कोई शिकायत नहीं है। इससे साफ जाहिर है कि बच्चों की मौ’त की सबसे बड़ी वजह कुपोषण है क्योंकि गरीब परिवार, बच्चों का भरन-पोषण नहीं कर पाते हैं तो बच्चे कमजोर हो जाते हैं और गर्मी के मौसम में चमकी बुखार के शिकार हो जाते हैं। अगर समयानुसार अस्पताल पहुंचाया जाए और पोषण दिया जाये तो बच्चों की मौ’त रुक जायेगी।

शिवानंद तिवारी

उन्होंने कहा कि 2014 में इस बुखार से सैकड़ों बच्चों की मौ’त हुई थी। इसके बाद सरकारी प्रयास किया गया, जिसके कारण 2015, 2016, 2017 में ज्यादा बच्चों की मौ’त नहीं हुई। इसबार सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठायी, जिसके कारण 150 से ज्यादा बच्चों की मौ’त हो गयी। आपको बता दें कि स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी स्वीकारा की कि जागरुकता अभियान नहीं चलाये जाने के कारण बच्चों की मौ’त हुई। उन्होंने यह भी कहा था कि अधिकारी लोकसभा चुनाव में व्यस्त थे, इसलिए जागरुकता अभियान नहीं चलाया जा सका।

जनता बेवकूफ बनी-

शिवानंद तिवारी का कहना है कि 2014 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बिहार की जनता से वादा किये थे कि मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से निपटने के लिए रिसर्च सेंटर खोला जायेगा, लेकिन आजतक नहीं खुल पाया। इतना ही नहीं, 2019 में फिर से कह रहे हैं कि अगले साल तक रिसर्च सेंटर खोला जायेगा। आखिर कब तक सरकार वादा खिला’फी करने का काम करेगी और जनता को बेवकूफ बनाते रहेगी।

नीतीश कुमार के बारे में शिवानंद ने कहा कि पता नहीं वे जनता को बेवकूफ समझते हैं कि क्या समझते हैं। उनका कहना है कि नीतीश कुमार ने कहा था कि बिहारी कहलाना गर्व की बात है तो किस बिहार पर आदमी गर्व करें। जिस बिहार में बच्चे कीड़े-मकोड़े की तरह म’र रहे हैं, क्या इस बिहार पर गर्व किया जा सकता है? हां, नीतीश कुमार इस बिहार पर गर्व कर सकते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने केन्द्र सरकार को भी इस मामले में दो’षी ठहराया।