खुदीराम बोस के फाँ’सी स्थल पर चढ़ाई जाएगी उनके जन्मभूमि की मिट्टी

PATNA : मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारागार स्थित शहीद खुदीराम बोस के फां’सी स्थल पर उनके शहादत दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में उनके जन्मभूमि की मिट्टी उस स्थान को अर्पित की जाएगी जहाँ उन्हे फां’सी दी गयी थी। खुदीराम बोस की अन्तिम इच्छा भी यही थी ।  बता दें कि खुदीराम बोस देश की आजादी में सबसे कम उम्र में फां’सी के फंदे को चूमने वाले शहीद थे।

खुदीराम बोस के परिजन

आपको बता दें कि उनकी ये इच्छा 111 साल बाद पूरी होने जा रही है। बताया जाता है कि 1947 में बांग्ला लेखक अधिवक्ता ईशानचंद्र महापात्र के लिखित पुस्तक शहीद खुदीराम से यह जानकारी मिली थी कि खुदीराम ने मुजफ्फरपुर जे’ल से मिदनापुर निवासी बहनोई अमृतबाबू को पत्र लिखकर सूचित किया था कि उनको 11 अगस्त को फां’सी की तिथि मुकर्रर की गई है। उनकी अन्तिम इच्छा है कि उनके गांव से सटे हबीबपुर के सिद्धेश्वरी काली मंदिर का चरणामृत फां’सी स्थल और चिताभूमि पर समर्पित किया जाए ।

खुदीराम बोस की इस इच्छा को पूरा करने के लिये उनके परिजन आ रहे हैं। सिद्धेश्वरी काली मंदिर का चरणामृत लेकर दीदी अपूर्णा देवी के पोते सुब्रत राय आ रहे हैं जो फां’सी स्थल और चिताभूमि पर समर्पित किया जाएगा। साथ में उस स्थान पर मिट्टी रखकर 111 पौधे भी लगाए जाएंगे। आपको बता दें कि साल 11 अगस्त 1908 में  यह महान क्रां’तिकारी शहीद हुए थे।  18 साल की उम्र में उन्हें फां’सी दे दी गई थी । खुदीराम का जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में हुआ था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुजफ्फरपुर जेल में जिस मजिस्ट्रेट ने उन्हें फां’सी पर लटकाने का आदेश सुनाया था, उसने बाद में बताया कि खुदीराम बोस एक शेर के बच्चे की तरह निर्भीक होकर फां’सी के त’ख़्ते की ओर बढ़ा था।