NDA का गढ़ रहा है जमुई लोकसभा सीट, पहले ही प्रयास में चिराग पासवान बने हीरो से MP

PATNA : लोक सभा चुनाव को लेकर चुनावी समर सज गई है। पक्ष और विपक्ष को हराने के लिए जी जान से मेहनत कर रहे हैं। हालांकि अभी तक ना तो महागठबंधन और ना एनडीए में सीटों का बंटवारा हुआ है। इस कड़ी में हम आपको आज जमुई लोक सभा सीट की कहानी सुनाने जा रहे हैं। जमुई से अभी रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान सांसद हैं। 

जमुई लोकसभा सीट 2009 में दोबारा अस्तित्व में आया और पहली बार यहां एनडीए के उम्मीदवार भूदेव चौधरी ने बाजी मारी। दूसरी बार जब राजग गठबंधन में यह सीट लोजपा के खाते में गई तो लोजपा के चिराग पासवान ने सीट आसानी से निकाल ली। हालांकि जमुई सुरक्षित क्षेत्र होने के कारण यहां घमासान कम रहता है। 1952 से पहले भी जमुई लोकसभा सीट हुआ करती थी। यहां से भाकपा के नेता भोला मांझी ने अपनी जीत दर्ज कराई थी। इसके बाद जमुई जिले को चार लोकसभा सीट में विभाजित कर दिया गया। जमुई विधानसभा को मुंगेर लोकसभा में, झाझा को बांका में, चकाई को गोड्डा एवं सिकंदरा को बेगूसराय में जोड़ने पर चारों लोकसभा क्षेत्र का उपनिवेश बनकर रह गया। 1952 से लेकर 2009 तक जमुई जिला उपेक्षित रहा। नए परिसीमन के बाद जमुई को अलग लोक सभा सीट का दर्जा मिला। लोकसभा क्षेत्र का दर्जा मिलने के बाद प्रमुख दलों के उम्मीदवार बाहर से ही आए।

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जमुई सीट पर कई बड़े नेताओं की नजर है। सुरक्षित सीट होने के कारण दलित और महादलित के कई बड़े राजनेता यहां से भाग्य आजमाना चाहते हैं। फिलहाल लोजपा के चिराग पासवान यहां के सांसद हैं, वैसे इस सीट पर जद यू के कद्दावर नेता अशोक चौधरी, रालोसपा के भूदेव चौधरी, अरुण कुमार, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, पूर्व सीएम जीतन राम मांझी सरीखे कई नेताओं की नजर है। सुरक्षित होने के कारण स्थानीय राजनेता को कोई लाभ नहीं है।

दस साल से यह सीट राजग के खाते में है। नए परिसीमन में सुरक्षित सीट होने के बाद 2009 में जदयू के भूदेव चौधरी ने जीत दर्ज कराई थी। उन्होंने राजद के श्याम रजक को पराजित किया था। इसके बाद 2014 में यह सीट लोजपा के खाते में गई और यहां से लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान ने जीत दर्ज कराई। इस बार भी अभी तक महागठबंधन ने उम्मीदवार स्पष्ट नहीं किया है जबकि राजग की ओर से चिराग एक बार रेस में हैं। जमुई में एक खेमा स्थानीय उम्मीदवार को लेकर भी लड़ाई लड़ रहा है।

वर्ष 2009 में अस्तित्व में आयी जमुई लोकसभा सीट वैसे तो अब तक राजग के खाते में ही गयी है। पहला चुनाव बड़ी ही आसानी से जद यू के उम्मीदवार भूदेव चौधरी ने जीत लिया था। उस समय जमुई के कद्दावर राजनेता और उनके पुत्र सह पूर्व विधायक स्व. अभय सिंह की बड़ी भूमिका रही थी। दूसरा चुनाव 2014 में लोजपा के चिराग पासवान ने जीता था। मोदी लहर ने चिराग की चुनावी राह को बहुत आसान बना दिया था। जदयू और राजद के अलग चुनाव लड़ने का फायदा चिराग को मिला था।

जमुई लोकसभा में पहली बार मैदान में आए चिराग ने दिग्गजों को हराकर सफलता प्राप्त की। लोजपा के चिराग पासवान ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद के सुधांशु शेखर भाष्कर को काफी अंतर से हराया। उस समय जद यू और भाजपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था और महागठबंधन ने अपने अलग उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। अभी तक महागठबंधन में टिकट स्पष्ट नहीं है।