बिहार के राजीव सिंह के जज्बे को सलाम, वर्दी पहनने का सपना टूटा, अब अफसरों को दे रहे ट्रेनिंग

PATNA : वे बचपन से खाकी वर्दी पहनकर देश और समाज की सेवा करने का सपना देखते थे, जब उनका सपना पूरा नहीं हुआ तो खुद अफसरों को ट्रेनिंग देने लगे। एक अच्छी जिद की ये कहानी है 32 वर्षीय युवा राजीव सिंह की विजिटिंग प्रोफेसर, स्वतंत्र पत्रकार और पुलिस-पब्लिक-मीडिया संबंध विशेषज्ञ राजीव छत्तीसगढ पुलिस अकादमी में आईपीएस अौर डीएसपी को व्यवहार पर्सनालिटी डेवल्पमेंट और कम्युनिकेशन स्किल की ट्रेनिंग दे चुके हैं। इसके अलावा वे मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी में भी प्रशिक्षण दे चुके हैं। वे कहते हैं कि 12 से ज्यादा इंटरव्यू में फेल हाेने से निराश हो चुके माता-पिता अब उनके कामों को देखकर खुश हैं। उन्होंने बताया कि मेरी बचपन से ही वर्दी पहनकर देश और समाज की सेवा करने की इच्छा थी। छाेटा था तो वर्दी वाला मूवी देखा करता था। बार- बार मूवी देखने के कारण डायलोग भी याद हो गए थे। अपने सपने को पूरा करने 12वीं के बाद ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गया।

शुरूआती सफलता मिली और इंटरव्यू के लिए बुलावा आने लगा। लगभग 12 से ज्यादा इंटरव्यू दिए पुलिस आर्मी और पर्सनालिटी आफिसर के लिए मगर दुर्भाग्यवश सफलता नहीं मिली। मम्मी और पापा कछ बोलते नहीं थे, पर मैं अहसास कर सकता था कि वे हर बार उम्मीद लगाकर निराश हो जाते थे। यह बात मुझे हमेशा कचोटती थी। आखिर मैंने डिसाइड किया कि कुछ एेसा करूंगा जिससे मम्मी और पापा को गर्व महसूस हाे सके ।

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जिन राज्यों की पीएससी परीक्षा की इंटरव्यू में विजिटंग प्रोफेसर में राजीव फेल हो गए थे, अब वहीं की अकादमी में ट्रेनिंग दे रहे हैं। उन्होंने दो बार छत्तीसगढ पीएससी की परीक्षा दी थी। इसके अलावा वे मध्यप्रदेश और बिहार पीएससी की परीक्षा में भी बैठ चुके हैं। छत्तीसगढ राज्य पुलिस अकादमी, चंद्रखुरी में वे 2014 बैच के आइपीएस और 2014, 2015 बैच के डप्टी एसपी को ट्रेनिंग दे चुके हैं। रायपुर में उनके पापा और विलासपुर में उनकी फुआ रहती हैं। छत्तीसगढ में अफसरों काे ट्रेनिंग देने के लिए आने पर उनके रिश्तेदार काफी खुश थे। प्राइमरी एजुकेशन मधेपुरा बिहार में और बांकी पटना स्कूलिंग, इंदौर से ग्रेजुएशन, दिल्ली से पीजी व भोपाल से पीएचडी में पढ़ाई की। वे अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पिता रिटायर पीडब्ल्यूडी इंजीनियर सत्यनारायण सिंह, मां नीलम सिंह को देते हैं। जो वर्तमान में सुपौल जिले में निवास कर रहे हैं। माता-पिता को इस बात की खुशी होती है कि उनका बेटा खाकी वर्दी नहीं पहन पाया तो क्या पुलिस और सिविल सेवा के अधिकारियों को ट्रेनिंग देकर ही देश और समाज की सेवा कर रहा है।