AES पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई,पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने का दिया निर्देश

PATNA : एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) से पी’ड़ित बच्चों के इलाज से संबंधित जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सर्वोच्च अदालत ने याचिका ख़ारिज करने से इंकार कर दिया और याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वो पटना हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करें।

अदालत ने कहा कि डॉक्टरों की कमी है और इस कमी को दूर करना सरकार का काम है। हम तो अभी जजों की कमी दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। दरअसल याचिकाकर्ता ने न्यायालय से कहा था कि बिहार में डॉक्टर्स के कुल पदों में से 57 प्रतिशत खाली हैं। जब डॉक्टर ही नहीं होंगे तो इलाज कौन करेगा। इस पर अदालत ने कहा कि इस समय हम कोर्ट में जजों की कमी को भर रहे है और आप चाहते है कि डॉक्टरों की कमी को भी हम ही पूरा करें?सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, कमी तो हर जगह है। जज, शिक्षक, पानी, सूर्य की रोशनी सब कुछ की किल्लत है। साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार के जवाब पर संतुष्टि व्यक्त की।

चमकी बुखार से कई बच्चों की हुई थी मौ’त

आपको बता दें कि AES (चमकी बुखार)से बिहार के अलग-अलग हिस्सों में करीब 175 से भी ज़्यादा बच्चों की मौ’त हुई थी। इसमें से सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) से म’रने वाले बच्चों की संख्या 132 जा पहुंची थी। इसमें से 111 बच्चों की मौ’त श्री कृष्ण मेमोरियल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में और 21 बच्चों की मौ’त केजरीवाल हॉस्पिटल में हुई थी। मुजफ्फरपुर के साथ ही हाजीपुर, समस्तीपुर, शिवहर, भागलपुर, बेगूसराय, भोजपुर और मोतिहारी में भी इस बीमारी से कई बच्चों की जा’न गई है। इससे पहले भी चमकी बुखार से लगातार हो रही बच्चों की मौ’त पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी , जिसमें कोर्ट ने कहा था कि यह गंभीर चिंता का विषय है और सरकार से जवाब माँगा था।