मायावती ने अखिलेश से गठबंधन तोड़ने का किया ऐलान,बुद्धिमान जनता ने अवसरवादी को नकारा-सुशील मोदी

PATNA: बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट के जरिये समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजपार्टी के कमजोर गठबंधन पर नि’शाना साधा है। मोदी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में करारी हा’र के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने सपा प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से गठबंधन तोड़ने का निर्णय लिया है, जो यह दर्शाता है कि उनका गठबंधन किसी खास और एकसमान विचारधारा के कारण नहीं बल्कि सिर्फ-व-सिर्फ भारतीय जनता पार्टी का वि’रोध करने के लिए हुआ था।

सुशील मोदी ने कहा कि जनता इस तरह की नकारा’त्मक सोच पर आधारित अवसरवादी गठबंधन को अपना वोट नहीं देकर बुध्दिमानी का काम की है। इसके लिए मैं बुध्दिमान जनता जनार्दन को शत्-शत् नमन करता हूं।

गौरतलब है कि मायावती ने लखनऊ की एक मीटिंग में कहा है कि उत्तर-प्रदेश में 11 सीटों के लिए होने वाले उप-चुनाव अकेले ल’ड़ेगें। कहने का मतलब यह है कि अब सपा-बसपा एक साथ मिलकर चुनाव नहीं ल’ड़ेगी। इससे यह संकेत मिलता है कि यूपी में सपा-बसपा का गठबंधन एकबार फिर से टू’टने वाला है।

मायावती क्यों अकेले लड़ना चाहती हैं उप-चुनाव-

2019 की लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और मोदी को ह’राने के लिए 25 साल पुरानी दुश्म’नी को भूलाकर अखिलेश यादव और मायावती ने एक साथ चुनाव ल’ड़ने का फैसला लिया और गठबंधन बनाया। मायावती को उम्मीद था कि सपा के पास अपना यादव वोट-बैंक है और उनके अपने पास दलित वोट-बैंक है। इससे लोकसभा चुनाव आसानी से ल’ड़ा और जीता जा सकता है, लेकिन रिजल्ट के बाद का दृश्य कुछ और ही है। यादवों का वोट भी मोदी और भाजपा को मिल गया, जिससे मायावती को सपा के साथ गठबंधन में रहने का कोई विशेष फायदा नजर नहीं आया, इसलिए वे सपा के साथ अपना गठबंधन तो’ड़ने का संकेत और आगामी उप-चुनाव साथ नहीं ल’ड़ने का निर्णय ले लिया।

गौरतलब है कि अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को खुद यादवों ने वोट नहीं दिया, जिसके कारण वो चुनाव हा’र गयी। इससे मायावती का शक और गहरा गया कि जब अखिलेश की पत्नी को यादवों ने वोट नहीं दिया तो मेरे नेता को कैसे देंगे?

यूपी का आगामी उप-चुनाव-

यूपी के 11 विधानसभा सदस्य, 2019 के लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन गये, जिसके कारण विधानसभा में सीटें खाली हो गयी। इसी खाली सीट को भरने के लिए उप-चुनाव होने वाला है।

25 साल बाद हुई गठबंधन एकबार फिर टू’टेगा-

25 साल पहले मायावती के साथ अखिलेश यादव के पिता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपने समर्थकों को भेजकर बदसलूकी की। इसके बाद माायवती ने मुलायम से अपना गठबंधन तो’ड़ लिया, लेकिन मोदी को हराने और जातीय-समीकरण के आधार पर चुनाव जीतने की आकांक्षा ने एकबार फिर से रिश्ते जोड़ने पर मजबूर कर दिया। मजबूरी में बनी रिश्तों से राजनीतिक स्वार्थ पूरा नहीं होने के कारण एकबार फिर से गठबंधन टू’टने के कगार पर पहुंच चुका है।